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9 kirjaa tekijältä Kailash Chandra Yadav
पुस्तक परिचय/लेखकीय तेरे अल्फ़ाज़ को नग़मों में गीत संग्रह फिल्म की तरह के गीतों का अद्भुत संग्रह है। मानव मन की हलचलों को शब्दों उतारना और वह भी गीत के माध्यम से आप तक पहुँचाना बड़ा मुश्किल कार्य है। जिस तरह का गीत-संगीत अब सुनने को मिलता है वह कानों में अधिक देर नहीं टिक पाता। कभी-कभी लगता है हमारी शास्त्रीय संस्कृति के साथ खिलवाड़ हो रहा है। आधुनिक डिजिटल प्रणाली ने इसमें सेंध लगायी है। तमाम प्रयासों के बाबजूद कलाकार अपनी प्रतिभा जनसामान्य तक लाने में असमर्थ है। कदम-कदम पर ऐसी बाधायें हैं जिन्हें पार करना असम्भव लगता है। मैं भी चाहता था कि मेरे गीत फिल्मों में आयें परन्तु यही बाधायें इर्द-गिर्द मेरा पीछा करती रही। इस गीत संग्रह में मैंने सभी तरह के मनोरंजक व दिल को छू लेने वाले गीतों का सृजन किया है। गीतों को मैं लगातार लिखता रहा हूँ और लिखता रहूँगा। मेरे ये गीत फिल्मों तक न पहुंच पाये तो क्या आप इन्हें सोशल मीडिया फेस बुक के माध्यम से पढ़ते रहे हैं और अब गीत संग्रह के माध्यम से पढ़ेंगे। कैलाश चन्द्र यादव 'गीतकार' काशीपुर जिला ऊधमसिंहनगर उत्तराखण्ड तेरे अल्फ़ाज़ को नग़मों मे गीत -कैलाश चन्द्र यादव
एक रंगीली लड़की ने जैसा कि आपको लग रहा है। रंगीली अर्थात इस गीत संग्रह में मनोरंजन को ध्यान में रखकर ही गीतों का सृजन किया गया है। मेरा प्रयास है बहुभाषायी फिल्मी गीतों से हटकर अपनी मातृभाषा हिन्दी को गीतों का माध्यम क्यों न बनाया जाये। सामान्य भाषा में लिखा गया हर गीत चाहे वह रोमांटिक है या दुःखद अपनी छाप छोड़ जाता है। मुझे इसका एहसास तब होता है जब देश-विदेश से फेसबुक के 300 से भी अधिक ग्रुप के सदस्यों से मुझे कमेन्ट मिलते हैं। फेसबुक पर जारी सामग्री का विस्तार अवश्य विश्व स्तर का है परन्तु एक पुस्तक एक गीत संग्रह का जो मजा है वह अलग ही होता है। पुस्तक हाथ में आते ही लगता है किसी ने हमारे एहसासों को छुआ। मानों ख़त में किसी का चेहरा दिखायी दिया। मुझे विश्वास है गीतों के माध्यम से जिन एहसासों पर मैंने कार्य किया है वे अवश्य आपके अन्तः मन को छुयेंगे। गीतों की विषय सामग्री तैयार करने में पाठकों के कमेन्ट उनकी पोस्टें बड़ी मददगार होती है। जब कोई विषय नहीं सूझता फेसबुक पर पाठकों के विचार भी गीत की शक्ल ले लेते हैं। ग्लैमरस चेहरे खुद-ब-खुद जहन में रंगीनियाँ ला देते हैं। मेरी अब तक की प्रकाशित पुस्तकों में इस गीत संग्रह पर बहुत बारीकियों के साथ काम किया गया है। फिर भी कहीं कोई त्रुटि नज़र आये तो आप इस नाचीज़ को अवश्य क्षमा करेंगे । कैलाश चन्द्र यादव 'गीतकार' काशीपुर, जिला - ऊधमसिंहनगर, उत्तराखण्ड
पुस्तक परिचय आँखें तेरी जानम पैमाने दो गीत संग्रह फिल्म की तरह के गीतों का अद्भुत संग्रह है। मेरे गीतों को सोशल मीडिया पर आपने अवश्य देखा होगा। फेस बुक के 280 से भी अधिक ग्रुपों में मेरे गीत पोस्ट पर रहते हैं I पाठकों के कमेन्ट्स लगातार मुझे मिलते हैं। इन्हीं गीतों को गीत संग्रह के माध्यम से आप तक पहुँचाने का मेरा प्रयास है। इसी श्रंखला में मेरी यह 19वीं पुस्तक गीत संग्रह आपके सामने है। मानव मन की हलचलों को शब्दों उतारना और वह भी गीत के माध्यम से आप तक पहुँचाना बड़ा मुश्किल कार्य है। जिस तरह का गीत-संगीत अब सुनने को मिलता है वह कानों में अधिक देर नहीं टिक पाता। कभी-कभी लगता है हमारी शास्त्रीय संस्कृति के साथ खिलवाड़ हो रहा है। आधुनिक डिजिटल प्रणाली ने इसमें सेंध लगायी है। तमाम प्रयासों के बाबजूद कलाकार अपनी प्रतिभा जनसामान्य तक लाने में असमर्थ है। कदम-कदम पर ऐसी बाधायें हैं जिन्हें पार करना असम्भव लगता है। मैं भी चाहता था कि मेरे गीत फिल्मों में आयें परन्तु यही बाधायें इर्द-गिर्द मेरा पीछा करती रही हैं। इस गीत संग्रह में मैंने सभी तरह के मनोरंजक व दिल को छू लेने वाले गीतों का सृजन किया है। गीतों को मैं लगातार लिखता रहा हूँ और लिखता रहूँगा। कैलाश चन्द्र यादव 'गीतकार' काशीपुर जिला ऊधमसिंहनगर उत्तराखण्ड
"गीत लेखन कैसे करें ? . इस पुस्तक के माध्यम से मैंने यह समझाने का प्रयास किया है कि हमारे नवोदित गीतकार/शायर/कवि किस तरह फ़िल्मी गीत सृजित करें उनको इस राह में आने वाली अड़चनों से अवगत कराने का मेरा प्रयास है। जैसे कि हम शब्दों की खोज कैसे करें ? गीत का स्थायी व अन्तरे केंसे लिखें? गीत लेखन में किन-किन बातों का हमें ध्यान रखना है ? एक गीत में रिदम का महत्व क्या है ? फिल्म जगत में आने वाले तमाम तरह के गीतों जैसे - रोमेंटिक या प्रेम गीत हास्य,दर्द भरे,लोकगीत आधारित, कव्वाली और सूफियाना, प्रान्तीय,विदेशी धुनों पर आधारित गीत क्या होते हैं और कैसे लिखे जाते हैं? साथ ही अपने लिखे गीतों का प्रचार प्रसार नये - नये माध्यमों से कैसे करें ? अपने गीत की प्रस्तुति कैसे करें? जनसामान्य तक अपनी प्रतिभा कैसे पहुँचायें ? इसके अतिरिक्त भी बहुत सी ऐसी जानकारियाँ इस किताब के माध्यम से जुटाने का मेरा प्रयास है जो आपको अन्यत्र नहीं मिल पायेंगी । फिल्म जगत में रुचि रखने वाले नये-पुराने सभी महानुभावों के लिये यह एक सूत्र का काम करेगी।"
Ho Gayi Re Me Sayani by Kailash Chandra Yadav
पुस्तक परिचय "दिल बेक़रार कै से न हो " गीत सं ग्रह एक बार पुनः आपकी बेक़रारियो को बढ ं ़ाने वाला है। सभी तरह के दःख-सुख के ु लम्हों को गी ्हों तो के म ं ाध्यम से आप तक पहुँचाने का प्रयास है। पलको के बन्द करने पर भी जब वह द ं िखाई दे, चन्द लम्हों की मुहब्ब ्हों त क्या- क्या रंग जीवन में लाती है, बैठे हैं इन्तज़ार में ...? चुपके से आकर जो दिल में हलचल मचा दे तो कै से न दिल बेकरार होगा। तरन्म में ग नु ाये जाने वाले फिल्मी अन्दाज लिये ये गीत आपके हृदय को अवश्य छुयेंगे । फे स बुक के मेरे तमाम दोस्त इन गीतो को प ं ढ़कर आनन्दित होते हैं। उनके कमेन्टस् मेरा उत्साहवर्धन करते हैं और मुझे नयी ऊर्जा प्रदान करते हैं। उनके लिखे अल्फ़ाज़ भी मेरे गीतो की ं विषय वस्तु बन जाते हैं । कैलाश चन्द्र यादव "गीतकार" काशीपुर जिला ऊधमसिहनगर ं उत्तराखण