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6 kirjaa tekijältä Kaka Hathrasi

Kaka Ke Thahake

Kaka Ke Thahake

Kaka Hathrasi

Prabhat Prakashan
2018
sidottu
काका हाथरसी हास्यरस के सच्चे कवि ही नहीं, काव्य-ऋषि थे। उनकी कविताओं के तीन रंग हैं-सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक। इन तीनों रंगों में काका हाथरसी ने कभी साहित्यिक शालीनता और शिष्टता की मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया। उनका हास्य गुदगुदाता है, मन में आह्लाद पैदा करता है, समाज की विसंगतियों और विकृतियों का पर्दाफाश भी करता है, लेकिन कभी किसी को दुःख अथवा पीड़ा नहीं पहुँचाता। उनका हास्य चाँदनी की ऐसी रजत-शीतल छटा है, जो निराशा, कुंठा और उदासी के अंधकार को बरबस भगा देती है। इन सब विशेषताओं के साथ उनके हास्य में ऐसी मौलिकता, सहजता, सामाजिक चेतना और साहित्यिक गरिमा है, जो उन्हें अन्य हास्य-कवियों से अलग करके हिंदी के आधुनिक हास्य-व्यंग्य साहित्य में सर्वोच्च स्थान का अधिकारी बनाती है। काका की कलम का कमाल कार से लेकर बेकार तक, शिष्टाचार से लेकर भ्रष्टाचार तक, परिवार से पत्रकार तक, विद्वान् से गँवार तक, फैशन से राशन तक, रिश्वत से त्याग तक और कमाई से महँगाई तक देखने को मिलता है। काका हाथरसी के इस संचयन 'फुलझडि़याँ' में उनकी ऐसी शिष्ट-विशिष्ट हास्य-व्यंग्य कविताओं का संकलन किया गया है, जो पाठकों को गुदगुदाएँगी, हँसाएँगी भी और सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था पर सोचने पर विवश भी करेंगी।
Kakke Ke Chchake

Kakke Ke Chchake

Kaka Hathrasi

DIAMOND BOOKS
2023
nidottu
काका हाथरसी की कविताई के बारे में दो शब्द भी बिना मन में हास्य सुख की लहर लाए नहीं रहे जा सकते। उनकी कविता में जितना हास्य रस है, उसके अनुपात में व्यंग भी कम नहीं है।हास्य अगर चौके हैं, तो चुटीले व्यंग इसलिए छक्के भर है क्योंकि मैदान में अभी सत्ते का चलन नहीं है।यह पुस्तक काका के इन्हीं अचूक छक्कों का आनन्द लेकर आपके पास आई है। उठाइये और पढ़िये-पढ़ाइये....