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4 kirjaa tekijältä Prabhakar Shrotriya

Kabir

Kabir

Prabhakar Shrotriya

Prabhakar Prakashan
2023
pokkari
प्रभाकर श्रोत्रिय (19 दिसंबर 1938-15 सितंबर2016) शीर्षस्थानीय आलोचक प्रभाकर श्रोत्रिय के बारे में आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने लिखा था, 'श्रोत्रिय को समीक्षक की उत्कृष्टकोटिक अंतर्दृष्टि निसर्गतः प्राप्त हैं।' और साहित्य की समकालीन पत्रिका 'शिखर' लिखती है, समकालीन आलोचना के क्षेत्र में प्रभाकर श्रोत्रिय संभवतः सबसे अधिक विश्वसनीयता के अधिकारी हैं। विख्यात कवि कथाकार वीरेंद्र कुमार जैन ने 'नवनीत' में लिखा था, 'साहित्य में डूबने की उनकी तन्मय संवेदना बड़ी सूक्ष्म और पंखुरी की तरह महीन है।' डॉ. श्रोत्रिय को केड़िया पुरस्कार देते हुए कहा गया था, 'अपनी मौलिक, अन्वेषणमयी, तटस्थ आलोचना दृष्टि के लिए वे अपनी पीढ़ी के अग्रतम आलोचक के रूप में अखिल भारतीय स्तर पर स्थापित हैं।' उ. प्र. हिंदी संस्थान ने उन्हें आलोचना के लिए आचार्य रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार देते हुए लिखा कि प्रभाकर श्रोत्रिय भारतीय और पाश्चात्य काव्यशास्त्र के उल्लेखनीय समकालीन विज्ञान आलोचकों में अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। अपनी सैद्धांतिक और व्यावहारिक आलोचना-कृतियों के माध्यम से आपने हिंदी आलोचना की भाषा को एक नया संवेग और त्वरा प्रदान की है। आपने आलोचना को ग्राह्य और पठनीय बनाया है। यह कहना सही होगा कि आपकी स्वस्थ दृष्टि ने स्वस्थ भाषा की रचना की है। ... आपने कविता का एक स्वस्थ सौंदर्यशास्त्र रचा है। पुस्तकें आलोचना-सुमनः मनुष्य और स्रष्टा, प्रसाद का साहित्य प्रेम तात्त्विक दृष्टि, कविता की तीसरी आँख, संवाद, कालयात्री है कविता, रचना एक यातना है, जयशंकर प्रसाद की प्रासंगिकता, मेघदूतः एक अंतर्यात्रा, शमशेर बहादुर सिंह, मैं चलूँ कीर्ति-सी आगे-आगे, हिंदी-कल आज और कल आदि।
Bhartiya Bhashaon mein Mahabharat ki sahitya-yatra

Bhartiya Bhashaon mein Mahabharat ki sahitya-yatra

Prabhakar Shrotriya

Prabhakar Prakashan Private Limited
2020
pokkari
'भारतीय भाषाओं में महाभारत की साहित्य यात्र' एक ऐसी पुस्तक है जो हमें अपने साथ एक यात्रा पर ले चलती है। महाभारत अपने आप में एक ऐसी कालजयी रचना है जो हजारों वर्षों के कालखण्ड से पारगमित होती हुई आज भी हमारे बीच है। गाँव-देहात हो या कस्बा-शहर हर जगह, हर पीढ़ी के लोगों को इस कथा के बारे में कुछ न कुछ अवश्य पता होता है। महाभारत के विषय में यह प्रसिद्ध है कि-'जो इस जीवन-जगत में है वह महाभारत में है और जो महाभारत में नहीं है वह कहीं नहीं है।' अर्थात जीवन-जगत के नाना व्यापारों का संग्रह, एक प्रकार से ज्ञान का इनसाइक्लोपीडिया है महाभारत। प्रभाकर श्रोत्रिय जी की इस पुस्तक की विशेषता यह है कि यह हमें भारतवर्ष की विभिन्न भाषाओं में रची गयी महाभारत कथाओं से परिचित करवाती है। एक दूसरी विशेषता यह भी है कि इस पुस्तक के द्वारा हम महाभारत के कई संस्करणों से दो-चार होते हैं। उदाहरण के लिए किसी भाषा की महाभारत कथा में कुंती और गांधारी का सगी बहनें होना, अर्जुन का अपने बेटे बब्रुवाहन के हाथों मारा जाना आदि कहानी को नए मोड़, नए अर्थ देते हैं। कथानक वही 'कौरवों-पांडवों के बीच का धर्म-युद्ध' होते हुए भी सहायक कहानियाँ बदली-बदली हैं। इस अंतर के पीछे काम करता है लोक, लोक की भाषा, लोक की समझ। लोक इन कहानियों को इतनी बार इतने तरीके से मथता है कि कुछ न कुछ नया निकलता रहता है। इसलिए 'महाभारत' का यह क्रम निरंतर चलता रहता है, कभी खत्म नहीं होता। हर समय, हर समाज अपना महाभारत रचता है और उसमें अपने अर्थ भरते हुए स्वयं अपने को खोजता है।
Ila

Ila

Prabhakar Shrotriya

Prabhakar Prakashan Private Limited
2022
pokkari
प्रभाकर श्रोत्रिय द्वारा रचित नाटक 'इला' विद्रोह की कथावस्तु है। यह नाटक अपने अंदर स्त्री-पुरुष की परस्पर अतिवादी दो प्रवृत्तियों (प्रकृतियों-विकृतियों) के भयावह अंतर्विरोध की त्रासदी को एक साथ झेलता, अतीत से भविष्य तक फैली एक शाश्वत ज्वलंत समस्या का अत्यंत समकालीन, सार्थक और उल्लेखनीय आधुनिक दस्तावेज है। लेखक ने विज्ञान से लेकर मनोविज्ञान तक, धर्म से लेकर कला तक के अनेक चित्रों को कुशलता से उभारा है। आशा करते हैं कि हमारा यह प्रयास पाठकों के लिए रूचिकर साबित होगा।