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3 kirjaa tekijältä Prem Janmejay

Trasadi Ka Badshah

Trasadi Ka Badshah

Prem Janmejay

JVP Publication Pvt Ltd
2021
pokkari
70 के उत्तरार्ध मे हिंदी साहित्य में जिस कहानीकार ने अपने करिश्माई कौशल से हिंदी कथा साहित्य को संपन्न समृद्ध ही नहीं किया बल्कि कहन और शिल्प के परिपेक्ष में भी ऐसी नई दिशाएं निर्मित की जो उसके पहले देखने में नहीं आती। हिंदी कथा साहित्य का यह सितारा लेखक था रमेश बतरा। जितनी तेजी से रमेश बतरा ने अपनी तेजस्वी उपस्थिति से कथा पाठकों को हिंदी कथा के एक नए आस्वाद से परिचित करवाया वह अद्भुत था लेकिन यह भी दुखद सत्य है कि जितनी तेजी से इस सितारा लेखक ने अपने लेखन से हिंदी कथा साहित्य को एक नए उन्मेष से पूरा उतनी ही तेजी से उसका असामयिक अस्त भी हो गया। इस कथा -सितारे के ऐसे दयनीय अंत की कभी कल्पना नहीं थी। लघु कथा आंदोलन वह स्वर्ण काल था जिसके अग्रणी रमेश बतरा थे।आज भी रमेश बतरा की मील का पत्थर कहानी नंग मंनग कथ्य और शिल्प के धरातल पर जिस तरह से कहन का निर्वाह प्रस्तुत करती है वह अद्भुत है ।पीढ़ियों का खून फाटक गवाह गैर हाजिर कत्ल की रात आदि कथा संकलन और कथाएं निश्चय ही वर्तमान में आलोचकों से पुनर्व्याख्या की मांग करती है। प्रेम जनमेजय ने इस किताब को सम्पादित कर रमेश के लिखे को पुनर्व्याख्या के लिए प्रस्तुत किया है।रमेश को जानने के लिए निश्चित ही यह एक ज़रूरी किताब है।--चित्रा मुद्गल
Narendra Kohli

Narendra Kohli

Prem Janmejay

JVP Publication Pvt Ltd
2021
sidottu
युगप्रर्वतक साहित्यकार नरेंद्र कोहली का एक विशाल पाठक वर्ग है जो उनकी रचनात्मकता का निरंतर 'सागर मंथन' कर बहुमूल्य रत्न प्राप्त करता है। उनकी कृतियों पर फ़िल्म और धारावाहिक बन रहे हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से अपने युग को प्रभावित किया है। 'अभ्युदय' और 'महासमर' जैसी पुराकथाओं के माध्यम से नरेंद्र कोहली ने आज के समय के प्रश्नों के समाधान खोजे हैं। उनका महत् उद्देश्य समाज की बेहतरी के लिए रचनाओं का सृजन करना है। इसी प्रक्रिया में वे विवेकानंद की जीवनी 'तोड़ो कारा तोड़ो' के द्वारा आज के समय में आदर्श मूल्यों की स्थापना करते हैं। नरेंद्र कोहली अपने नायकों- राम, कृष्ण और विवेकानंद के द्वारा निरंतर ऐसे समाधन की खोज में हैं जो इस मानव सभ्यता को स्वयं नष्ट को होने से बचा सके।उनके व्यंग्य लेखन में उनकी प्रखर व्यंग्य दृष्टि के दर्शन होते हैं तो नाटकों में सशक्त संवाद शैली के। ऐसे विराट व्यक्तित्व को वही जान सकता है जिसने उन्हें बहुत समीप से देखा-परखा हो। प्रतिष्ठित व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय के, अपने गुरुवर, नरेंद्र कोहली के साथ 56 वर्ष पुराने संबंध है।वे नरेंद्र कोहली को अपने साहित्यिक और व्यक्तिगत जीवन की पाठशाला मानते है।इस पाठशला में प्रेम जनमेजय ने नरेंद्र कोहली साहित्य का गहन अध्ययन, मंथन और नरेंद्र कोहली के अनुकरणीय व्यक्तित्व का विश्लेषण किया है। 'नरेंद्र कोहली एक शिनाख्त' युगप्रर्वतक साहित्यकार के विशाल रचनात्मक सागर को गुणवत्तापूर्ण गागर में भरने का स्तुत्य कर्म है।