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5 kirjaa tekijältä Rakesh Arya Kumar

Ghodo Par Ghode Toot Pade, Talwar Ladi Talwaron Se (घोड़ो पर घोड़े टूट पड़े तलवार लड़ी तलवा&
अकबर का राज्य संपूर्ण भारत पर तो छोड़िए आधे भारत पर भी नहीं रहा, पर उसे हिंदुस्तान का सम्राट कहा जाता है। दूसरी ओर भारत के अंतिम हिंदू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य को भुला दिया जाता है, जिसने अपने जीवन में 20 से अधिक युद्धों में विदेशी हमलावरों को पराजित किया था और जिसका दिल्ली ने वास्तविक सम्राट के रूप में स्वागत किया था।कहने का अभिप्राय है कि भारत के शौर्य ने जैसे अब से पूर्व के सुल्तानों को निशंक शासन नहीं करने दिया था, वैसे ही उसने बाबर, हुमायूं, शेरशाह, अकबर और जहांगीर को भी निशंक शासन नहीं करने दिया। सर्वत्र विरोध, प्रतिरोध और प्रतिशोध की त्रिवेणी बहती रही और हिन्दू अपने धर्म और देश की रक्षा के लिए निरंतर सचेष्ट और क्रियाशील रहा...उसकी तलवार को और उसकी हुंकार को इतिहास की आत्मा ने सदा नमन किया है।
Hindutva Ki Chetna Ke Swar

Hindutva Ki Chetna Ke Swar

Rakesh Arya Kumar

diamond pocket books pvt ltd
2022
pokkari
'हिंदुत्व की चेतना के स्वर' - भारत की संस्कार आधारित संस्कृति को स्पष्ट करने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। संस्कारों का निर्माण कर भारत ने अपनी संस्कृति का निर्माण किया है। इन संस्कारों ने व्यष्टि से समष्टि तक एक ऐसी सुन्दर व्यवस्था विकसित की, जिसे विश्व संस्कृति के नाम से भी संबोधित किया जा सकता है। इस व्यवस्था में सर्वत्र सुख-शांति के दर्शन होते हैं।लेखक राकेश कुमार आर्य हिन्दी दैनिक 'उगता भारत' के मुख्य सम्पादक हैं। 17 जुलाई, 1967 को उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जनपद के महावड़ ग्राम में जन्मे लेखक की अब तक 50 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिनके लिए उन्हें राजस्थान के राज्यपाल रहे कल्याण सिंह जी सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों, संस्थाओं, संगठनों और देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों / शैक्षणिक संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। भारतीय वैदिक संस्कृति और इतिहास पर उनका लेखन निरंतर जारी है।प्रस्तुत पुस्तक के अध्ययन से यह पूर्णतया स्पष्ट और सिद्ध हो जाता है कि सुख-शांति की तलाश में भटकता मानव यदि भारत की संस्कार आधारित संस्कृति को अपना ले और हृदय से उसकी महानता को स्वीकार कर ले तो यह संसार फिर से सुख-शान्ति का आगार बन सकता है। प्रस्तुत पुस्तक के प्रत्येक अध्याय में लेखक हमें इसी ओर चलने की प्रेरणा देते हुए दिखाई देते हैं।भारत का एकात्म मानववाद, धर्म, संस्कृति-संस्कार और इनके भीतर रचे-बसे मानवीय मूल्य आज भी मानवता व संसार का मार्गदर्शन करने में सक्षम हैं। लेखक इस तथ्य को समझाने व स्थापित करने में पूर्णतया सफल रहे हैं। लेखक का मानना है कि यही वे स्वर हैं, जिन्होंने हिंदुत्व को सदैव जीवन्त बनाए रखा है और भारत की संस्कृति को सनातन का नाम दिया है।
Bharat Ki Videsh Neeti

Bharat Ki Videsh Neeti

Rakesh Arya Kumar

diamond pocket books pvt ltd
2022
pokkari
डॉ. राकेश कुमार आर्य अपने राष्ट्रवादी चिन्तन के लिए जाने जाते हैं। इस क्षेत्र में साहित्य सृजन करके उन्होंने साहित्यिक जगत में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया है। उनकी कृति 'भारत की विदेश नीति' - एकात्म मानववाद पर आधारित भारत की वैश्विक शांति को बढ़ावा देने वाली विदेश नीति को स्पष्ट करने वाला एक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। इस पुस्तक में लेखक ने भारत के पड़ोसी देशों के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी देकर पुस्तक को बहुत ही उपयोगी बना दिया है।लेखक की यह स्पष्ट मान्यता है कि प्राचीन काल से ही भारत ने वैश्विक नेतृत्व किया है और राजनीति के क्षेत्र में ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं जिनसे मानव का आज भी भला हो सकता है। भारत की विदेश नीति की समीक्षा करते हुए डॉ. आर्य द्वारा लिखित यह ग्रंथ समकालीन इतिहास का एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है।डॉ. राकेश कुमार आर्य हिन्दी दैनिक 'उगता भारत' के मुख्य सम्पादक हैं। 17 जुलाई, 1967 को उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जनपद के महावड़ ग्राम में जन्मे लेखक की अब तक 55 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिन पर उन्हें राजस्थान के राज्यपाल रहे कल्याण सिंह जी व भारत सरकार सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों, संस्थाओं, संगठनों और देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों / शैक्षणिक संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।लेखक ने भारत की विदेश नीति के महत्त्वपूर्ण अंगों को जिस प्रकार परिभाषित किया है, उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि संयुक्त राष्ट्र को भारत की प्राचीन विदेश नीति को आज के संदर्भ में संसार के सभी देशों को अनिवार्य रूप से उसके अनुसार कार्य करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
Jai Bheem - Jai Meem Aur Babasaheb

Jai Bheem - Jai Meem Aur Babasaheb

Rakesh Arya Kumar

diamond pocket books pvt ltd
2022
pokkari
'जय भीम-जय मीम और बाबासाहेब' पुस्तक ऐतिहासिक तथ्यों से भरपूर एक शोधपरक दस्तावेज है, जो भारत के बाहरी-भीतरी राजनीतिक षड्यन्त्रों को कई परतों को खोलती है और हर देशभक्त को झकझोरती है। अपनी अनूठी राष्ट्रवादी लेखन शैली के लिए विख्यात डॉ. राकेश कुमार आर्य भारतवर्ष के उन लब्ध प्रतिष्ठित इतिहासकारों में से एक हैं जिनकी लेखनी के साथ मां भारती की चेतना बोलने लगती है। श्री आर्य ने इस पुस्तक के माध्यम से एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि वह राष्ट्र की नब्ज पर हाथ रखकर लिखते हैं।प्रस्तुत पुस्तक में भी डॉ. आर्य ने कई रहस्यों से पर्दा उठाया है और देश के राष्ट्रवादी लोगों के हृदय को सीधे-सीधे झकझोरा है। 17 जुलाई, 1967 को उत्तर प्रदेश के जनपद गौतमबुद्ध नगर के महावड नामक गांव में जन्मे लेखक की अब तक 55 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने अपने राष्ट्रवादी लेखन के माध्यम से इतिहास को नई परिभाषा प्रदान की है।प्रस्तुत पुस्तक को आद्योपांत पढ़ने से स्पष्ट होता है कि बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर इस्लाम के विषय में बड़ा स्पष्ट मत रखते थे कि यह मजहब भारतवर्ष के लिए एक 'अभिशाप' है। इस्लाम के विषय में ऐसा स्पष्ट चिन्तन गांधीजी और नेहरूजी कभी नहीं व्यक्त कर सके।पुस्तक इस बात को दृष्टिगत रखकर लिखी गई है कि आज के तथाकथित अम्बेडकरवादी 'जय भीम और जय मीम' के जिस गावबंधन को बनाकर प्रस्तुत कर रहे हैं उसे बाबासाहेब के विचारों के अनुकूल कतई नहीं कहा जा सकता। विद्वान लेखक श्री आर्य इस पुस्तक के माध्यम से अपने इस मत को सिद्ध करने में पूर्णतया सफल रहे हैं। सुस्तक यह संदेश देती है कि हिन्दू समाज को तोड़ने के सभी कुचक्रों से हमें सावधान रहते हुए राष्ट्र निर्माण के लिए एक होकर आगे बढ़ना होगा।