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2 kirjaa tekijältä Virendra Kumar Shekhar

Biru: Itihas ke Sath Vichar Yatra  (Edition1st)
बीसवीं शताब्दी के अंतिम चतुर्थांश से लेकर इक्कीसवीं सदी के प्रारम्भ के वर्षों की कालावधि में भारत में जो हुआ वो इससे पहले कभी नहीं हुआ था। इतिहास का पहिया इस समय अवधि में जितनी तेजी से घूमा उतनी तेजी से इससे पहले कभी नहीं घूमा था। इस तेजी से बदलते हुए इतिहास के एक साक्षी और कर्मयोगी के माध्यम से इस परिवर्तन की दिशा, दशा और इंसानी दायित्व को समझने का प्रयास मैंने अपनी रचना बिरू - इतिहास के साथ विचार-यात्रा' में करने का प्रयास किया है।उपर्युक्त सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में भारत के विकास की पृष्ठभूमि में उपन्यास के नायक बिरू की विचार-यात्रा और उसके परिणाम स्वरूप हुई विकास-यात्रा सुधी पाठकगण के सम्मुख है। उदहारण के लिए इसी पुस्तक से "मानव-जीवन में वास्तविक विकास और सच्चा सुख तभी संभव है जब अज्ञानता का उन्मूलन हो, स्वतंत्र चिंतन को प्रोत्साहन मिले और स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के साथ लोकतांत्रिक आदर्शों का पालन हो।"
Shresth Se shresthtam Kaise Bane (Edition1st)

Shresth Se shresthtam Kaise Bane (Edition1st)

Virendra Kumar Shekhar

DIAMOND BOOKS
2025
nidottu
इस पुस्तक का सबसे महान संदेश यह है कि मानव आत्मा अचूक और अपराजेय है और परमात्मा ने प्रत्येक मानव में एक असाधारण सामर्थ्य का बीज डाला है। और यदि कोई व्यक्ति अपने उस पूर्ण सामर्थ्य तक नहीं पहुँच पाता, तो दोष उस व्यक्ति में नहीं, बल्कि उसके चारों ओर के वातावरण, सामाजिक ढांचे और परिस्थितियों में होता है। यह एक आत्म-सहायता रूपी मार्गदर्शिका है, जो न केवल आत्मसुधार में सहायक है, बल्कि आत्मविकास, आत्मपरिष्कार और आत्मशांति की ओर भी ले जाती है। मैं डॉ. वी. के. शेखर की दार्शनिक गहराई को समझने की क्षमता और उसे सामान्य पाठकों के लिए बोधगम्य, रोचक और ग्राह्य रूप में प्रस्तुत करने की प्रतिभा से अभिभूत हूँ।