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1000 tulosta hakusanalla SWAMI RAM CHARRAN

Swami Vivekanand Ke Sapno Ka Bharat

Swami Vivekanand Ke Sapno Ka Bharat

Himanshu Shekhar

DIAMOND BOOKS
2011
nidottu
स्वामी विवेकानंद का दृष्टिकोण आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक सोच का अद्भुत संगम था। उन्होंने भारत के सम्पूर्ण विकास, समृद्धि, शांति एवं प्रगति के लिए सपने संजोए थे। स्वामी जी के कार्यों, प्रवचनों एवं रचनाओं को देखकर उनके सपनों के भारत की रूप-रेखा को सहज ही समझा जा सकता है।भारत के नीति निर्माता पश्चिमी सोच से प्रभावित हैं। इसी कारण देश में निरंतर समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। यदि नीति निर्माता स्वामी विवेकानंद के विचारों और सपनों को आत्मसात कर नीतियों का निर्धारण करें तो निश्चय ही सभी समस्याओं का सहज समाधान मिल सकता है। स्वामी विवेकानंद की रचनाओं और उनके प्रवचनों से कुछ विशिष्ट उद्धरण देते हुए लेखक हिमांशु शेखर ने यही इस पुस्तक में समझाने का प्रयास किया है। हिमांशु शेखर की गिनती तेजी से उभरते हुए युवा पत्रकारों में की जाने लगी है। जनसत्ता से अपने लेखन की शुरुआत करने वाले हिमांशु के लेख तकरीबन सभी प्रमुख पत्रा-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं। सक्रिय पत्रकारिता में कम समय में ही उनके लगभग 600 लेख अलग-अलग पत्रा-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। अपने बेबाक लेखन से वे हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। डायमंड बुक्स से हिमांशु शेखर की कई अन्य रचनाओं के साथ ही अत्यंत चर्चित पुस्तक 'मैनेजमेंट और कार्पोरेट गुरु चाणक्य' हिंदी के अलावा अंग्रेजी, बांग्ला, गुजराती, मराठी, तमिल, मलयालम, असमी एवं नेपाली में प्रकाशित हुई है।
Swami Vivekanand Ek Jeevni

Swami Vivekanand Ek Jeevni

Asha Prasad

DIAMOND BOOKS
1998
nidottu
भारत में समय-समय पर जन्]म लेकर अनेक मनीषियों ने सत्]य अन्वेषण वैदिक ॠषियों की परम्]परा को निरंतर बनाए रखा। स्]वामी विवेदकानंद वर्तमान युग में इसी परंपरा के प्रतिनिधि थे। वह ब्रह्मचर्य, दया, करुणा आदि उदात्]त मानीवय गुणों के मूत रूप थे। उनके लिए प्राणीमात्र परमात्]मा का अंश था। उनकी तर्कशक्ति अद्वितीय थी। शिकागो विश्]व धर्म सम्]मेलन मे उनके व्]यक्तित्]व से विश्]व मुग्]ध हो उठा था। इसके बाद पश्चिमी जगत में उन्]होंने अनेक स्]थानों पर व्]याख्]यान दिए। इससे भारतीय वेदांत का वास्]तविक स्]वरूप विश्]व के समक्ष आया और अनेक अमरीकी तथा यूरोपीय उनके शिष्]य बन गए। स्]वमी विवेकानंद जहां एक ओर सर्व धर्म समभाव के प्रतीक थे, वहीं उन्]हें अपने हिंदू होने का गर्व भी था। लेखक भवान सिंह राणा ने स्]वामी जी के जीवन और कर्म का प्रभावी वर्णन इस पुस्]तक में किया है।