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267 tulosta hakusanalla Bankim Chandra Chatterjee
बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म सन् 1838 को एक खुशहाल बंगाली परिवार में हुआ था। वे बांग्ला भाषा के प्रख्यात उपन्यासकार एवं कवि थे। बंकिमचन्द्र ने भारतीय मानवीय भावों को सहज शब्दों में दर्शाया है। धर्म, समाज, जाति एवं राजनीति के मुद्दों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला है, भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार इनकी रचनाओं में अपनी छवि को देखता है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों के लिए ये प्रेरणास्रोत थे। बंकिमचन्द्र ने 'देवी चौधरानी' उपन्यास में भारतीय स्त्रियों की दुर्दशा को जीवंत रूप दिया है। प्रफुल्ल एक गरीब लड़की है, जिसका विवाह सुखीसम्पन्न परिवार में होता है। परंतु गरीबी के कारण उसे घर से निकाल दिया जाता है। इसके बाद वो पूरी कहानी में संघर्ष करती नजर आती है। इस कहानी में स्त्री के मजबूत इरादों को सुंदर तरीके से उकेरा गया है।
आनंदमठ बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित एक ऐतिहासिक और देशभक्तिपूर्ण उपन्यास है, जो 18वीं सदी के बंगाल में संन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह उपन्यास ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीयों के संघर्ष और देशभक्ति की भावना को प्रकट करता है। "वंदे मातरम्" जैसे अमर राष्ट्रगीत को जन्म देने वाला यह उपन्यास स्वतंत्रता, बलिदान और मातृभूमि के प्रति प्रेम की भावना से ओत-प्रोत है।उपन्यास के पात्र और उनकी संघर्ष यात्रा पाठकों के मन में देशभक्ति और साहस की गहरी भावना जगाते हैं। आनंदमठ केवल एक कथा नहीं है, बल्कि यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के शुरुआती संघर्षों की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है, जो आज भी उतनी ही प्रेरणादायक है जितनी तब थी।
आनंदमठ बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित एक ऐतिहासिक और देशभक्तिपूर्ण उपन्यास है, जो 18वीं सदी के बंगाल में संन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह उपन्यास ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीयों के संघर्ष और देशभक्ति की भावना को प्रकट करता है। "वंदे मातरम्" जैसे अमर राष्ट्रगीत को जन्म देने वाला यह उपन्यास स्वतंत्रता, बलिदान और मातृभूमि के प्रति प्रेम की भावना से ओत-प्रोत है।उपन्यास के पात्र और उनकी संघर्ष यात्रा पाठकों के मन में देशभक्ति और साहस की गहरी भावना जगाते हैं। आनंदमठ केवल एक कथा नहीं है, बल्कि यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के शुरुआती संघर्षों की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है, जो आज भी उतनी ही प्रेरणादायक है जितनी तब थी।
Krishnakant ka Vasiyatnama
Bankim Chandra Chattopadhyay
Prabhakar Prakashan Private Limited
2025
sidottu
"1882 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का बांग्ला उपन्यास आनन्द मठ प्रकाशित हुआ। 18वीं सदी के संन्यासी विद्रोह और बंगाल के अकाल की पृष्ठभूमि पर लिखा यह पाठकों में बहुत लोकप्रिय हुआ। इस बात से घबरा कर कि इससे देशप्रेम और विद्रोह की भावना जागृत होगी, उस समय की अंग्रेज़ सरकार ने आनन्द मठ पर प्रतिबंध लगा दिया जो 1947 में देश के स्वतंत्र होने के बाद हटाया गया। आनन्द मठ आधुनिक भारतीय साहित्य का एक मील का पत्थर माना जाता है और यह पाठकों में आज भी बेहद लोकप्रिय है। इसका अनुवाद लगभग हर भारतीय भाषा में उपलब्ध है। इसमें सम्मिलित गीत 'वंदे मातरम्' को देश का राष्ट्रगीत बनने का गौरव मिला। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय (चटर्जी) (27 जून, 1838 - 8 अप्रैल 1894) बांग्ला के महान कवि और उपन्यासकार थे। बांग्ला के अलावा वे संस्कृत के विद्वान थे। अपना साहित्यिक जीवन उन्होंने कविता से शुरू किया लेकिन वे अपने उपन्यासों के लिए अधिक जाने जाते हैं। आनन्द मठ के अतिरिक्त दुर्गेश नंदिनी, कपाल कुंडला, देवी चौधरानी, मृणालिनी उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं। अपने लेखन के द्वारा वे लोगों में नवजागरण करना चाहते थे। उनके जैसी कहानी कहने की कला शायद ही किसी और भारतीय लेखक में मिलती है। "
आनंदमठ' बंकिमचंद्र जी का राजनीतिक उपन्यास है। इस उपन्यास में उत्तर बंगाल में 1773 के संन्यासी विद्रोह का वर्णन किया गया है। इस पुस्तक में देशभक्ति की भावना है। अंग्रेजों ने इस ग्रन्थ पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। इस कृति का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और स्वतंत्रता के क्रांतिकारियों पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। भारत का राष्ट्रीय गीत 'वन्दे मातरम्' इसी उपन्यास से लिया गया है। 'आनंदमठ' के तब से अब तक न जाने कितनी भाषाओं में कितने संस्करण छप चुके हैं। महर्षि बंकिम ने अप्रशिक्षित किन्तु अनुशासित संन्यासी सैनिकों की कल्पना की है, जो अनुभवी ब्रिटिश सैनिकों से संघर्ष करते हैं और उन्हें पराजित करते हैं। उपन्यास को बाद में 1952 में हेमेन गुप्ता द्वारा निर्देशित फिल्म 'आनंदमठ' में रूपांतरित किया गया। यह उपन्यास आजादी के आंदोलन का प्रेरणास्रोत भी बना। आनंदमठ को इसकी साहित्यिक उपलब्धि से ज्यादा राजनीतिक सफलता के लिए याद किया जाता है। बंकिमचंद्र चटर्जी का यह उपन्यास बंगाल की अपने समय की पृष्ठभूमि को हमारे सामने जीवंत प्रस्तुत करने में सार्थक सिद्ध हुआ।
Fiber Reinforced Polymer (FRP) Composites in Ballistic Protection
Bankim Chandra Ray
SPRINGER VERLAG, SINGAPORE
2024
sidottu
This book highlights the pulchritudinous features of FRP composites emphasizing failure criteria referring to microstructural as well as micromechanical aspects. The potential and promises of this class of material as being explored for supercritical applications necessitate the analysis and assessment of FRPs with a spectrum of low to high strain rates. Additionally, constitutive modeling and shock properties of polymeric composites along with the data processing techniques and relevant theories for different characterization methods are conversed. The findings of previous studies available on mechanical characteristics of polymer composites under quasi-static and high-strain-rate circumstances are also discussed. The dearth of open literature and limited information culminate the need for this book which may eventually bridge the existing gap.
Fiber Reinforced Polymer (FRP) Composites in Ballistic Protection
Bankim Chandra Ray
SPRINGER VERLAG, SINGAPORE
2025
nidottu
This book highlights the pulchritudinous features of FRP composites emphasizing failure criteria referring to microstructural as well as micromechanical aspects. The potential and promises of this class of material as being explored for supercritical applications necessitate the analysis and assessment of FRPs with a spectrum of low to high strain rates. Additionally, constitutive modeling and shock properties of polymeric composites along with the data processing techniques and relevant theories for different characterization methods are conversed. The findings of previous studies available on mechanical characteristics of polymer composites under quasi-static and high-strain-rate circumstances are also discussed. The dearth of open literature and limited information culminate the need for this book which may eventually bridge the existing gap.
Anandmath in Bengali (???????)
Bankim Chandra Chattopadhyay
diamond pocket books pvt ltd
2026
pokkari
বঙ্কিমচন্দ্র চট্টোপাধ্যায় একজন অগ্রণী বাঙালি ঔপন্যাসিক। তাঁর লেখা কেবল বাংলা সাহিত্যকেই সমৃদ্ধ করেনি, হিন্দিকেও উপকৃত করেছে। তাঁর জনপ্রিয়তা এতটাই যে গত ১৫০ বছর ধরে তাঁর উপন্যাসগুলি বিভিন্ন ভাষায় অনূদিত হযেছে এবং সেই গুলির অসংখ্য সংস্করণ প্রকাশিত হয়েছে। তাঁর উপন্যাসগুলি নারীর অন্তর্নিহিত যন্ত্রণা এবং শক্তিকে শক্তিশালীভাবে প্রকাশ করে। তাঁর উপন্যাসগুলি নারীর মর্যাদাকে একটি নতুন পরিচয় এবং ভারতীয় ইতিহাসের ক্ষেত্রে একটি নতুন দৃষ্টিভঙ্গি প্রদান করেছে। ঐতিহাসিক উপন্যাস লেখার ক্ষেত্রে তিনি ছিলেন সিদ্ধহস্ত। তাঁকে ভারতের আলেকজান্ডার ডুমাস হিসেবে বিবেচনা করা হয়।