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1000 tulosta hakusanalla Gaurav Vashisht

Liek Gaurav

Liek Gaurav

Gaurav Soni

Xlibris Nz
2020
pokkari
A portrait of my family This chapter tells about the family Gaurav grew up with. Basically, about his family background, memoirs, and the prominent personalities who mold his consciousness. It tells about his recollections of the big family and how it was like to be in that family. What values they shared and how he was reared. The poignant days of provincial life This chapter tells about the greeneries and the environment of the provincial life he grew up with. This chapter captures recollection of the typical provincial life depicting farm life. What were the tasks Gaurav used to do? How he looked at them from his perspective as a boy back then? A leap to the big city This chapter narrates his first big risk among all the risks he has done in his life and that is going to the big city. Life in New Zealand This chapter narrates what life had been in New Zealand. Woven in this chapter are his recollections of hardships and stories of personal triumph. "Is this what I want to do with my life?" This chapter narrates the road he has taken to accomplish his big dreams and what were the intersectional paths in his life that made him think: "Is this what I want to do with my life?" Paying it forward This chapter tells about the important morsels of wisdom he has collected along the way in his journey from being an ordinary rural boy to a business magnate. This chapter weaves his learnings of the past, his fulfillment of the present, and the promises of the future ahead of him.
Gyarahvin-A Ke Ladke Stories by Gaurav Solanki

Gyarahvin-A Ke Ladke Stories by Gaurav Solanki

Gaurav Solanki

Rajkamal Prakashan Pvt. Ltd
2018
sidottu
गौरव सोलंकी नैतिकता के रूढ़ खाँचों में अपनी गाड़ी खींचते-धकेलते लहूलुहान समाज को बहुत अलग ढंग से विचलित करते हैं। और, यह करते हुए उसी समाज में अपने और अपने हमउम्र युवाओं के होने के अर्थ को पकडऩे के लिए भाषा में कुछ नई गलियाँ निकालते हैं जो रास्तों की तरह नहीं, पड़ावों की तरह काम करती हैं। इन्हीं गलियों में निम्न-मध्यवर्गीय शहरी भारत की उदासियों की खिड़कियाँ खुलती हैं जिनसे झाँकते हुए गौरव थोड़ा गुदगुदाते हुए हमें अपने साथ घुमाते रहते हैं। वे कल्पना की कुछ नई ऊँचाइयों तक किस्सागोई को ले जाते हैं, और अकसर सामाजिक अनुभव की उन कंदराओं में भी झाँकते हैं जहाँ मुद्रित हिन्दी की नैतिक गुत्थियाँ अपने लेखकों को कम ही जाने देती हैं।इस संग्रह में गौरव की छह कहानियाँ सम्मिलित हैं, लगभग हर कहानी ने सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर एक खास किस्म की हलचल पैदा की। किसी ने उन्हें अश्लील कहा, किसी ने अनैतिक, किसी ने नकली। लेकिन ये सभी आरोप शायद उस अपूर्व बेचैनी की प्रतिक्रिया थे, जो इन कहानियों को पढक़र होती है।..कहने का अंदाज गौरव को सबसे अलग बनाता है, और देखने का ढंग अपने समकालीनों में सबसे विशेष। उदारीकृत भारत के छोटे शहरों और कस्बों की नागरिक उदासी को यह युवा कलम जितने कौशल से तस्वीरों में बदलती है, वह चमत्कृत करनेवाला है।.. आर. चेतान्क्रन्ति
Rashtra Gaurav Ratan Tata

Rashtra Gaurav Ratan Tata

Prateeksha M. Tiwari

DIAMOND BOOKS
2010
nidottu
किसी समय भारत को सँपेरों का देश कहा जाता था, परन्तु बदलते वक्त ने अब इसे विश्व की दूसरी सबसे बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्था बना दिया है। आज इस देश के पास दुनिया भर में अपनी प्रसिद्धि फैला चुके रतन टाटा जैसे कई अनमोल रत्न मौजूद है।रतन टाटा आज विश्व के सर्वोच्च उद्योगपतियों में से एक है। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज़ी से बदलती तस्वीर को नया रूप देने में भी अमूल्य योगदान दिया है।आज हर कोई टाटा के नाम से भली-भांति परिचित है। नमक से लेकर भारी-भरकम वाहनों तक का निर्माण करने में टाटा समूह कार्यरत है। आप आज प्रत्येक क्षेत्र में जिसका आपके जीवन से सरोकार है, टाटा की उपस्थिति महसूस करेंगे।रतन टाटा एक ऐसा व्यक्तित्व है जिनके जैसा बनने की कल्पना देश का हर व्यक्ति करता है। वे देश के सबसे गौरवशाली औद्योगिक समूह के चेयरमैन हैं। यहाँ 'टाटा समूह' की जमशेद जी टाटा से लेकर रतन टाटा तक पहुँचने की यात्रा को बड़े ही सरल ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक रतन टाटा एवं उनके पूर्वजों के जीवन के जाने-अनजाने तथ्यों को पाठकों तक पहुँचाने का सफल प्रयास है।
Alakshit Gaurav : Renu

Alakshit Gaurav : Renu

Surendra Narayan Yadav

Rajkamal Prakashan Pvt. Ltd
2018
sidottu
आंचलिक कथाकार के रूप में ख्याति के विपरीत इस आलोचनात्मक कृति में रेणु में एक वैश्विक रचनाकार का संधान उपलब्ध है। जाहिर है रेणु का महत्त्व इस कृतिकार के लिए वही नहीं है जो अन्य के लिए है। आखिर क्यों? कथाकार रेणु को देखने-परखने का अलग ही अन्दाज है इस पुस्तक में जो मौलिक ही नहीं, सर्वथा नवीन भी है। प्रस्तुत कृति पारम्परिक मतों से लेखक की मतभिन्नता तो प्रस्तुत करती ही है, अपने औचित्य का सतर्क-सप्रमाण प्रतिपादन भी करती है। अस्तु, रेणु के महत्त्व-निर्धारण के लिए अलग नजरिये की गम्भीर प्रस्तावना करती यह आलोचना पुस्तक वैश्विक पाठकों को मिलने वाले साहित्य-रस और विचार-सार का खुलासा भी करती है।'भाषा की जड़ों को हरियाने वाला रसायन जो उसे जिन्दा रखता है, उसे सम्पन्न करता है, वह 'लोक' का स्रोत है। इस स्रोत की राह दिखाने के लिए हम रेणु के ऋणी हैं।' हमारे समय की वरिष्ठतम गद्यकार कृष्णा सोबती ने अपने साक्षात्कारों आदि में अनेक बार इस बात का उल्लेख किया है। उन्हें लगता है कि रेणु ने सभ्य भाषाओं और नागरिकताओं के इकहरे वैभव के बीच भारत के उस बहुस्तरीय वाक् को स्थापित किया जो अनेक समयों की अर्थच्छटाओं को सोखकर संतृप्त ध्वनियों में स्थित हुआ है और वास्तव में वही है जो भारत के असली विट और सघन अर्थ-सामर्थ्य का प्रतिनिधित्व करता है।रेणु ने अपने लोक के आनन्द और अवसाद इन्हीं ध्वनियों, इन्हीं भंगिमाओं में व्यक्त किये। दुर्भाग्य से देश के किसी और हिस्से से ऐसा साहस करने वाले लेखक न आ सके, और सिर्फ यही नहीं, रेणु को और उनकी वाक्-भंगिमाओं को समझने वाले लोगों की भी कमी महसूस की गई। परिणाम यह कि उनको बड़ा तो मान लिया गया लेकिन उनका बहुत कुछ ऐसा रह गया जिसे न समझा गया, न समझा जा सका।यह पुस्तक रेणु के उसी अलक्षित को लक्षित है। लेखक का कहना है कि 'इसके पूर्व र
Ghost Hunter Gaurav Tiwari

Ghost Hunter Gaurav Tiwari

Abhirup Dhar

Rupa Publications India Pvt. Ltd
2023
nidottu
'Gaurav Tiwari was a visionary and wanted to do what no one other than him had ever thought of. I have been a fan of his from the moment I got to know about him.' -Sunil Bohra Producer, Gangs of Wasseypur and Tanu Weds Manu Shocked by the mysterious death of Gaurav Tiwari at the age of thirty-two, acclaimed horror writer Abhirup Dhar contacted the team at Indian Paranormal Society (IPS), founded by the late paranormal investigator, to understand his life and work. This book is the result of the intense conversations that followed. As the IPS team related some of the most spine-chilling cases they had investigated, Abhirup learnt more about Gaurav. And the paranormal. From a parking lot haunted by the ghosts of young children, to Lambi Dehar, filled with the tortured souls of the thousands who had died there; from the unhappy spirits in Mukesh Mills to phantoms in the labyrinths of a court-Gaurav and the IPS team investigated the most haunted places in India. Knowledge cancels fear, Gaurav used to say. It was a motto he lived by and kept in mind as he carried out his investigations, uncovering mysteries of the dead and undead. This is a book for anyone interested in horror, the supernatural and the paranormal, capturing as it does both the incredible life of Gaurav Tiwari as well as his chilling encounters with unearthly beings.
Bharatiye Itihas Ke Gaurav Chhatrapati Sambhaji Maharaj (Edition1st)
छत्रपती शिवाजी महाराजांचे पुत्र छत्रपती संभाजी महाराज हे भारतमातेचे महान सुपुत्र होते. त्यांनी त्यांचे वडील छत्रपती शिवाजी महाराज यांचा भारताला हिंदू राष्ट्र म्हणजेच शहिंदवी स्वराज्यश् बनवण्याचा विचार पुढे नेण्याचा निर्णय घेतला. त्यांच्या पित्याच्या महान कल्पनेला प्रत्यक्षात आणण्यासाठी त्यांनी भारताला मुघलमुक्त करण्याचा संकल्प केला. भारतीय इतिहासाचे दुर्दैव असे आहे की लोकप्रिय इतिहासात आपण छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या शहिंदवी स्वराज्यश्च्या संकल्पाकडे दुर्लक्ष करतो, तर आपण छत्रपती संभाजी महाराजांचा भारताला मुघलमुक्त करण्याचा संकल्प देखील लपवण्याचा प्रयत्न करतो
Mewad Ke Maharana Aur Unki Gaurav Gatha (????? ?? ??????? ?? ???? ???? ????)
'मेवाड़ के महाराणा' पुस्तक भारत के गौरवशाली इतिहास पर एक महत्वपूर्ण शोध ग्रन्थ है। भारत के गौरवशाली हिंदू इतिहास के वीर योद्धाओं के साथ किस प्रकार खिलवाड़ करते हुए छल - प्रपंच और षड़यंत्रात्मक शैली में उनके पराक्रम, शौर्य और वीरता को छुपाने का प्रयास किया गया है - उस सारे घालमेल का सही ढंग से भंडाफोड़ करने में यह पुस्तक सफल रही है। मेवाड़ के महाराणा इसी प्रकार के द्वेषात्मक घालमेल के शिकार हुए। जिनकी वीरगाथा को इतिहास में वह स्थान नहीं दिया गया, जिसके वह पात्र थे।'भारत को समझो' अभियान के अंतर्गत भारत के युवाओं को जगाने का काम कर रहे पुस्तक के विद्वान लेखक डॉ. राकेश कुमार आर्य का जन्म 17 जुलाई 1967 को उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जनपद के महावड़ नामक ग्राम में हुआ। जिनकी अब तक 67 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। डॉ आर्य इतिहास के अनछुए पृष्ठों को उजागर करते हुए हिंदू इतिहास के वीर योद्धाओं और क्रांतिकारियों को इतिहास में उनका समुचित स्थान दिलाने के लिए कृत संकल्पित हैं।इस पुस्तक के अध्ययन से यह पूर्णतया स्पष्ट हो जाता है कि भारत को समझने के लिए वर्तमान में प्रचलित इसके इतिहास के हर पृष्ठ पर बिखरी उस काली स्याही को साफ करने की आवश्यकता है जो हमारे बलिदानों के इतिहास को नष्ट करने का काम करती रही है। पुस्तक स्पष्ट करती है कि राज भी गहरे हैं और दाग भी गहरे हैं। जिन्हें खोलने के लिए परिश्रम, पुरुषार्थ, विवेक और संयम की आवश्यकता है।डॉ. आर्य अपनी गंभीर चिंतन शैली में जब लिखते हैं तो वह गहरे गहरे राजों को और गहरे गहरे दागों को साफ करते चलते हैं। अपनी इसी विशिष्ट शैली के माध्यम से उन्होंने भारत के सुप्रसिद्ध राष्ट्रवादी इतिहासकारों में अपना स्थान बनाया है।