Kirjailija
A. G. Krishnamurthy
Kirjat ja teokset yhdessä paikassa: 7 kirjaa, julkaisuja vuosilta 2006-2021, suosituimpien joukossa Dhirubhaism. Vertaile teosten hintoja ja tarkista saatavuus suomalaisista kirjakaupoista.
Mukana myös kirjoitusasut: A.G.KRISHNAMURTHY
7 kirjaa
Kirjojen julkaisuhaarukka 2006-2021.
WHILE LUCK IS A HAPPENING OR AN EVENT AND IS ACCIDENTAL, SUCCESS IS PLANNED AND ACHIEVED BY A RIGOROUS APPLICATION OF CERTAIN TIME-TESTED PROCESSES. TEN MUCH IS A COLLECTION OF STORIES OF PEOPLEXSOME FAMOUS AND SOME FAIRLY UNKNOWNXWHO WENT ON TO BE SUCCESSFUL DESPITE SEVERE ADVERSITIES BEING THROWN AT THEM, SIMPLY BY FOLLOWING A FEW BASIC PROCESSES. - DREAM...DREAM BIG - BECOME THE MASTER OF YOUR TRADE - BE POSITIVE - I CAN DO IT - MONEY IS A BY-PRODUCT - HOLD ON TO YOUR DREAMS - BET ON YOUR TEAM - WELCOME CHALLENGES - EVERYONE SHOULD PROSPER - IT S JUST ONE LIFE...असामान्य यशप्राप्तीसाठी १० सामान्य सूत्रे नशीब ही घटना असते, योगायोगानं घडणारी, पण काळाच्या कसोटीवर ख-या उतरलेल्या विशिष्ट प्रक्रिया अत्यंत परिश्रमपूर्वक अनुसरल्या तर यश साध्य होऊ शकतं... अगदी आखीवरेखीव, योजल्याप्रमाणे. हे काही सुप्रसिद्ध व काही अगदी अपरिचित व्यक्तींच्या स्फूर्तीदायी यशोगाथांचं संकलन आहे. या व्यक्तींनी काही अगदी मूलभूत सूत्र अनुसरून अंत्यतिक प्रतिकूलतेवर मात केली आणि यश खेचून आणलं.
A self-made man Dhirubhai Ambani was not born with a silver spoon in his mouth. He was the most enterprising Indian entrepreneur, who is remembered as the one who rewrote Indian corporate history and built a truly global corporate empire. Dhirubhai is credited with shaping India's equity culture and attracting millions of retail investors in a market that was hitherto dominated by financial institutions. He was the man who revolutionised capital markets. From a scratch, he generated billions of Rupees for those who invested their trust in his companies. His efforts helped create an equity cult in the Indian capital markets.Dhirubhai Ambani always hated defeat. His 'rags to riches' tale thrilled and motivated many a young entrepreneur. Despite a businessman, his career was so extraordinary that he was more than just an entrepreneur. A hero for millions of Indians his legacy continues in the form of Reliance, the most trusted Indian corporate brand name in the world. Dhirubhai lives in the dreams of those who dared to tread the treacherous lanes of the business world.
'आसमान को छू लो, में एक ऐसे संघर्षमय बीज की कहानी है जिसने हवाओं के थपेड़ों को सहते हुए अंकुरण के लिए उचित स्थान की तलाश की। बीज का पौधे में बदलना और फिर वृक्ष रूप धारण करना शायद सुनने में आम बात लगे। किंतु यह वृक्ष आम वृक्षों में शामिल नहीं किया जा सकता। इसकी जड़ों की गहराई से इसके पत्तों की चमक का अंदाजा लगाया जा सकता है। जड़ों की गहराइयों का पूर्ण अंदाजा पाठक इस पुस्तक के माध्यम से लगा सकता है। इस बीज का विकसित होकर वृक्ष बनने की कहानी के पीछे छिपी है दिन-रात की कड़ी मेहनत, सत्य, निष्ठा और जड़ों का पूर्ण सहयोग ए. जी. कृष्णमूर्ति, मुद्रा कम्युनिकेशंस के संस्थापक चेयरमैन व एम.डी. हैं, उन्होंने 35,000 की कुल पूंजी व एक ग्राहक के साथ एजेंसी की शुरुआत की। नौ वर्षों के भीतर ही, 'मुद्रा' भारत की तीसरी विशाल विज्ञापन एजेंसी बन गई। इस समय श्री कृष्णामूर्ति जी, ए. जी. के. ब्रांड कंसल्टिंग के चेयरमैन पद पर हैं।
धीरूभाई की कहानी 'बूँद से सागर' बनने तक की सुन्दर कहानी है, उनकी जीवन यात्रा गुजरात के एक छोटे से गाँव से शुरू होकर भारत में सबसे पहली निजी स्वामित्व वाली 500 फार्च्यून कम्पनियों के संस्थापक पद तक रही। उन्होंने कोई औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की किन्तु फिर भी वे अपनी चतुर व्यावसायिक बुद्धि व उद्यम कौशल के लिए जाने जाते थे। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि धीरूभाई का कार्य-दर्शन उनके समकालीनों से बिल्कुल अलग था ।यह पुस्तक धीरूभाई के जीवन या उन्होंने अपना व्यावसायिक साम्राज्य कैसे बनाया, इस विषय पर नहीं लिखी गयी है । लेखक ने धीरूभाई में उन असाधारण अंतर्दृष्टियों को सहजने का प्रयास किया है, जिन्हें उन्होंने धीरूभाई के साथ लम्बे समय तक काम करते हुए सीखा । इस पुस्तक में 15 धीरूबाइज्म के दार्शनिक विचारों को समग्र रूप में एक साथ रखने से ही धीरूभाई का कार्य दर्शन स्पष्ट होता है । जिससे भारत के सबसे अधिक सफल उद्यमियों में एक धीरूभाई की चिन्तन प्रक्रिया व अभ्यासों की झलक मिलती है ।ए. जी. कृष्णमूर्ति, मुद्रा कम्युनिकेशन के संस्थापक चेयरमैन व एम. डी. हैं, उन्होंने 35,000 की कुल पूंजी व एक ग्राहक के साथ एजेंसी की शुरुआत की । नौ वर्षों के भीतर ही, 'मुद्रा' भारत की तीसरी विशाल विज्ञापन एजेंसी बन गयी।इस समय श्री कृष्णमूर्ति जी, ए.जी.के. ब्रांड कन्ल्टिंग के चेयरमैन पद पर हैं। उनकी चार संताने हैं, जिनमें से तीन पुत्रियाँ व एक पुत्र है । वे अपने परिवार के साथ हैदराबाद व अहमदाबाद में रह रहे हैं।