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Kirjailija

Ashok Kaushik

Kirjat ja teokset yhdessä paikassa: 10 kirjaa, julkaisuja vuosilta 2000-2024, suosituimpien joukossa Pravasita Priya (Edition2024). Vertaile teosten hintoja ja tarkista saatavuus suomalaisista kirjakaupoista.

10 kirjaa

Kirjojen julkaisuhaarukka 2000-2024.

Pravasita Priya (Edition2024)

Pravasita Priya (Edition2024)

Ashok Kaushik

DIAMOND BOOKS
2024
sidottu
भारतीय साहित्य की लोक एवं नीति कथाएं विश्व में अपना विशिष्ट स्थान नाये हुए हैं। इन लोकनीति कथाओं के स्रोत हैं, संस्कृत साहित्य की अमर कृतियां - हितोपदेश एवं पंचतंत्र।पचतंत्र में इसके रचयिता श्री विष्णु शर्मा ने राजकुमारों को राजनीति - विशारद बनाने के लिए अनेक पशु-पक्षियों को माध्यम बनाकर नीति की कथाएं कही हैं। वे कथाएं और उनके बीच में आयी हुई सूक्तियां आज के इस आपा-धापी के युग में निश्चय ही मानव के लिए उपयोगी हैं।कोलमति बालकों के लिए ये कहानियां एक ओर मनोरंजन और कौतूहल की सामग्री प्रस्तुत करती हैं और दूसरी ओर उन्हें नीति-निपुण, चुस्त मानव एवं प्रबुद्ध नागरिक बनाने में सहायता करती हैं।बालकों के लिए ही नहीं वयस्क एवं प्रौढ़ व्यक्तियों के लिए भी ये कहानियां समान रूप से उपयोगी एवं संग्रहणीय हैं।
Above Life’s Turmoil (Edition2024)

Above Life’s Turmoil (Edition2024)

Ashok Kaushik

DIAMOND BOOKS
2024
sidottu
भारतीय साहित्य की लोक एवं नीति कथाएं विश्व में अपना विशिष्ट स्थान नाये हुए हैं। इन लोकनीति कथाओं के स्रोत हैं, संस्कृत साहित्य की अमर कृतियां - हितोपदेश एवं पंचतंत्र।पचतंत्र में इसके रचयिता श्री विष्णु शर्मा ने राजकुमारों को राजनीति - विशारद बनाने के लिए अनेक पशु-पक्षियों को माध्यम बनाकर नीति की कथाएं कही हैं। वे कथाएं और उनके बीच में आयी हुई सूक्तियां आज के इस आपा-धापी के युग में निश्चय ही मानव के लिए उपयोगी हैं।कोलमति बालकों के लिए ये कहानियां एक ओर मनोरंजन और कौतूहल की सामग्री प्रस्तुत करती हैं और दूसरी ओर उन्हें नीति-निपुण, चुस्त मानव एवं प्रबुद्ध नागरिक बनाने में सहायता करती हैं।बालकों के लिए ही नहीं वयस्क एवं प्रौढ़ व्यक्तियों के लिए भी ये कहानियां समान रूप से उपयोगी एवं संग्रहणीय हैं।
Bharat Ke Mahan Swatantrata Senani

Bharat Ke Mahan Swatantrata Senani

Ashok Kaushik

DIAMOND BOOKS
2022
nidottu
मानव जीवन में संस्कारों का बहुत बड़ा महत्त्व है। संस्कारों के द्वारा सद्गुणों का विकास करके समाज में उपयोगी बनना है । संस्कार का अर्थ होता है व्यक्तित्व को सजाना, संवारना, उच्च और स्वच्छ बनाना। इन्हीं संस्कारों में पण्डित मदनमोहन मालवीय जी पले थे।ऐसे संस्कारों से ही महामना मदनमोहन मालवीय जी अपने त्याग, धर्मरक्षा, भक्ति, सात्विकता, पवित्रता, धर्मनिष्ठा, आत्मत्याग आदि सद्गुणों के तो साक्षात् अवतार ही थे। मालवीय जी समाज के प्रति और देश को आजाद कराने में अनेक कष्ट सहन करते हुए अपने कर्तव्य से कभी विमुख नहीं हुए। मालवीय जी की हार्दिक इच्छा थी कि वह भारतीय संस्कृति, हिंदू-मुस्लिम एकता और सभी प्राणियों पर दया करें। यद्यपि मालवीय जी आज विद्यमान नहीं हैं, परंतु उनकी कीर्ति, उनके द्वारा रोपित पादप काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, आज भी वट वृक्ष का रूप धारण कर समस्त संसार में शिक्षा के रूप में प्रख्यात हैं। बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ उनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त करते हैं, धर्मध्वजी मालवीयजी के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए उनके पद- चिह्नों पर चलने की प्रेरणा लेते हैं। इस पुस्तक में मालवीय जी के जीवन का पूरा विवरण प्रस्तुत है ।
Yogiraj Arvind

Yogiraj Arvind

Ashok Kaushik

DIAMOND BOOKS
2005
nidottu
जहां दूसरे लोग देश को एक जड़ वस्तु, कुछ मैदान, जंगल, पहाड़ और नदी समझते हैं, वहां मैं अपने देश को अपनी माता मानता हूं। मैं उसकी पूजा करता हूं और मां की भांति उसकी भक्ति करता हूं। जब कोई राक्षस मां की छाती पर बैठ कर उसका खून चूस रहा हो तो उस समय उसका पुत्र क्या करेगा ? क्या वह चुपचाप अपने खान-पान में लगा रहेगा और अपने परिवार के साथ मौज मनाता रहेगा? या इसके बदले में मां को बचाने के लिए दौड़ पड़ेगा ? मैं जानता हूं कि इस पतित जाति को उठा सकने की सामर्थ्य मुझमें है। यह कोई शारीरिक सामर्थ्य नहीं, और मैं तलवार या बन्दूक लेकर भी लड़ने नहीं जा रहा, यह तो ज्ञान की शक्ति है। क्षत्र तेज ही शक्ति का एकमात्र तेज नहीं है, ब्रह्म तेज भी है, वह तेज ज्ञान के ऊपर प्रतिष्ठित है।
Kautilaya Arthshashtra

Kautilaya Arthshashtra

Ashok Kaushik

DIAMOND BOOKS
2005
nidottu
अधिकांश लोग 'कौटिल्य अर्थशास्त्र' को इकोनॉमिकल शास्त्र (वाणिज्य व धन संबंधी अध्ययन ग्रंथ) जानते हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है, वस्तुतः यह तो राज्य-व्यवस्था का विवरणात्मक व निर्देशित अध्ययन ग्रंथ है, जो विश्व प्रसिद्ध है। रचनाकार कौटिल्य का ही एक नाम चाणक्य था। उन्होंने इस ग्रंथ की रचना कर राज्य-व्यवस्था और प्रजा-पालन का बृहद ज्ञान प्रस्तुत किया है। यह मूल रूप से संस्कृत भाषा में है। प्रस्तुत पुस्तक उक्त शास्त्र का हिंदी अनुवाद है। पाठकों को आसानी से समझ में आ जाए इसके लिए सरल, सुस्पष्ट और बोधगम्य भाषा का प्रयोग किया गया है। मेरा मानना है कि इस अथाह ज्ञान रूपी ग्रंथ का अध्ययन मनुष्य को अपने जीवनकाल में एक बार अवश्य करना चाहिए।
Yug Pravartak Mahatama Budh

Yug Pravartak Mahatama Budh

Ashok Kaushik

DIAMOND BOOKS
2000
nidottu
सरस्वती, प्रयाग, गया, बाहुमती, सुन्दरिका आदि नदियों में पापकर्मी मूढ़ चाहे जितना स्नान करें, वे शुद्ध नहीं होंगे। ये नदियां पापकर्मी को शुद्ध नहीं कर सकतीं। शुद्ध मनुष्य के लिये तो सर्वत्रा ही गया है। शुद्ध तथा शुचिकर्मा के व्रत सदा पूर्ण होते हैं। यदि तुम मिथ्या भाषण नहीं करते, बिना दिये लेते नहीं, श्रद्धावान् हो, मत्सर रहित हो, तो 'गया' जाने से क्या लाभ? क्षुद्र जलाशय भी तुम्हारे लिये 'गया' है।- महात्मा बुद्ध