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Kirjailija

Dayanand Pandey

Kirjat ja teokset yhdessä paikassa: 22 kirjaa, julkaisuja vuosilta 2021-2026, suosituimpien joukossa Dayanand Pandey Ke 3 Charcheet Upanyas. Vertaile teosten hintoja ja tarkista saatavuus suomalaisista kirjakaupoista.

22 kirjaa

Kirjojen julkaisuhaarukka 2021-2026.

Dayanand Pandey Ke 3 Charcheet Upanyas

Dayanand Pandey Ke 3 Charcheet Upanyas

Dayanand Pandey

JVP Publication Pvt Ltd
2021
pokkari
सहजता ही दयानंद पांडेय के उपन्यासों की शक्ति है। उन के उपन्यासों में व्यौरे बहुत मिलते हैं। ऐसा लगता है, जीवन को यथासंभव विस्तार में देखने की एक रचनात्मक जिद भी उन के उपन्यासकार का स्वभाव है। इस शक्ति और स्वभाव का परिचय देते उन के यह तीन उपन्यास इस में पढ़े जा सकते हैं। इन तीनों उपन्यासों में समकालीन समाज के कुछ ऐसे बिंब हैं जिनमें 'अप्रत्याशित जीवन' की अनेक छवियां झिलमिलाती हैं। 'स्त्री' दयानंद पांडेय के उपन्यासोंके मुख्य सरोकारों में से एक है। मन्ना जल्दी आना, मुजरिम चांद और मैत्रेयी की मुश्किलें और इन के चरित्र जीवन का अनुसरण करते हैं। किसी घोषित आंदोलन का नहीं। हो सकता है किसी पाठक-आलोचक को इन कहानियों और चरित्रों में बौद्धिक मारकाट या सैद्धांतिक संघर्ष ऊपरी सतह पर तैरता न दिखे, फिर भी शीर्षक लगा कर निष्कर्ष देने के स्थान पर ये रचनाएं जीवन को समस्त विचलनों के साथ सामने लाती हैं। मन्ना जल्दी आना भारत, बांगलादेश और पाकिस्तान के त्रिकोण में छटपटाते जाने कितने हिंदुओं-मुसलमानों के दुखों का बयान है। अब्दुल मन्नान और उन के परिवार की कहानी में जाति, धर्म, सियासत के कई समकालीन धब्बे भी दिखते हैं। सहज विवेक से दयानंद पांडेय ने इस कहानी को 'सांप्रदायिकता' से बचा लिया है। लेखक ने एक पुरानी युक्ति के रूप में तोते का इस्तेमाल किया है, जो तोताचश्म जमाने को देखते हुए एक नया अर्थ भी दे सकता है। दयानंद पांडेय का एक और उपन्यास मुजरिम चांद भी प्रशासन, पत्रकारिता और समाज की एक रोचक कहानी है। मुजरिम चांद में एक राज्यपाल हैं और अभिनेता दिलीप कुमार भी । किस तरह एक छोटी सी 'त्रुटि' के बाद पत्रकार राजीव का उत्पीड़न होता है और कैसे विशिष्ट के सामने सामान्य व्यक्ति उच्छिष्ट बन कर रह जाता है, इसे किस्सागोई के अंदाज में लेखक ने रेखांकित किया
36 Kahaniyan (36 ????????)

36 Kahaniyan (36 ????????)

Dayanand Pandey

diamond pocket books pvt ltd
2026
pokkari
यह कहानी-संग्रह किसी वैचारिक आंदोलन का घोषणापत्र नहीं है। यह उस सूक्ष्म 9 जीवन-दर्शन का दस्तावेज़ है, जो साधारण घटनाओं के भीतर चुपचाप आकार लेता है। इन कहानियों में न कथा-कौशल का प्रदर्शन है, न भाषा का अलंकरण-यहां संयम ही सौंदर्य है और मौन ही सब से मुखर वक्तव्य। इन 36 कहानियों का संयुक्त प्रभाव यह है कि पाठक स्वयं को किसी एक कथा में नहीं, बल्कि अनेक कथाओं के छोटे-छोटे टुकड़ों में पहचानता है-कहीं वह पिता है, कहीं पुत्र; कहीं स्त्री है, कहीं समाज; कहीं दोषी है, कहीं पीड़ित।
Lok Kavi Ab Gate Nahun (Novel)

Lok Kavi Ab Gate Nahun (Novel)

Dayanand Pandey

DIAMOND BOOKS
2023
sidottu
कोई 13 उपन्यास, 13 कहानी-संग्रह समेत कविता, गजल, संस्मरण, लेख, इंटरव्यू, सिनेमा सहित दयानंद पांडेय की विभिन्न विधाओं में 75 पुस्तकें प्रकाशित हैं। अपनी कहानियों और उपन्यासों के मार्फत लगातार चर्चा में रहने वाले दयानंद पांडेय का जन्म 30 जनवरी, 1958 को गोरखपुर जिले के एक गांव बैदौली में हुआ। वर्ष 1978 से पत्रकारिता । सर्वोत्तम रीडर्स डाइजेस्ट, जनसत्ता, नई दिल्ली, स्वतंत्र भारत, नवभारत टाइम्स, राष्ट्रीय समाचार फीचर्स नेटवर्क तथा राष्ट्रीय सहारा लखनऊ और दिल्ली में संपादक, विशेष संवाददाता आदि विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे दयानंद पांडेय के उपन्यास, कहानियों, कविताओं और गजलों का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद भी प्रकाशित हुआ है। लोक कवि अब गाते नहीं का भोजपुरी अनुवाद प्रकाशित। बड़की दी का यक्ष प्रश्न, सुमि का स्पेस का अंग्रेजी में, बर्फ में फंसी मछली का पंजाबी में और मन्ना जल्दी आना का उर्दू में अनुवाद प्रकाशित। कुछ कविताओं, गजलों और कहानियों का प्रिया जलतारे द्वारा मराठी में अनुवाद। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा प्रतिष्ठित सम्मान क्रमशः लोहिया साहित्य सम्मान और साहित्य भूषण । उत्तर प्रदेश कर्मचारी संस्थान द्वारा साहित्य गौरव । लोक कवि अब गाते नहीं उपन्यास पर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का प्रेमचंद सम्मान कहानी संग्रह 'एक जीनियस की विवादास्पद मौत' पर यशपाल सम्मान तथा फेसबुक में फंसे चेहरे पर सर्जना सम्मान सहित अन्य अनेक सम्मान मिल चुके हैं।
Katha-Gorakhpur Khand-2 (???-??????? ???-2)

Katha-Gorakhpur Khand-2 (???-??????? ???-2)

Dayanand Pandey

DIAMOND BOOKS
2023
nidottu
जाग मछंदर गोरख आया कह कर अपने गुरु को ही जगाने वाले महाकवि गुरु गोरखनाथ ने लिखा है न मरो वै जोगी मरौ, मरण है मीठा ।मरणी मरौ जिस मरणी, गोरख मरि दीठायहां गोरख, अहंकार को मारने की बात करते हैं। तो गुरु गोरखनाथ की धरती की गमक में गमकती कथा - गोरखपुर की यह कहानियां दिल की घाटियों में संतूर की तरह बजती हैं। कथा - गोरखपुर की खास खासियत यह है कि कमोवेश सभी कहानियां गोरखपुर की माटी की खुशबू में तर-बतर हैं। इन कथाओं में गोरखपुर की माटी ऐसे बोलती है जैसे मां बोलती है। एक से एक नायाब कहानियां हैं इस कथा - गोरखपुर में । गोरखपुर की माटी की महक इन कथाओं में महकती, गमकती और इतराती हुई इठलाती मिलती है।
Katha-Gorakhpur Khand-3 (???-??????? ???-3)

Katha-Gorakhpur Khand-3 (???-??????? ???-3)

Dayanand Pandey

DIAMOND BOOKS
2023
nidottu
जाग मछंदर गोरख आया कह कर अपने गुरु को ही जगाने वाले महाकवि गुरु गोरखनाथ ने लिखा है न मरो वै जोगी मरौ, मरण है मीठा ।मरणी मरौ जिस मरणी, गोरख मरि दीठायहां गोरख, अहंकार को मारने की बात करते हैं। तो गुरु गोरखनाथ की धरती की गमक में गमकती कथा - गोरखपुर की यह कहानियां दिल की घाटियों में संतूर की तरह बजती हैं। कथा - गोरखपुर की खास खासियत यह है कि कमोवेश सभी कहानियां गोरखपुर की माटी की खुशबू में तर-बतर हैं। इन कथाओं में गोरखपुर की माटी ऐसे बोलती है जैसे मां बोलती है। एक से एक नायाब कहानियां हैं इस कथा - गोरखपुर में । गोरखपुर की माटी की महक इन कथाओं में महकती, गमकती और इतराती हुई इठलाती मिलती है।
Katha-Gorakhpur Khand-5 (???-??????? ???-5)

Katha-Gorakhpur Khand-5 (???-??????? ???-5)

Dayanand Pandey

DIAMOND BOOKS
2023
nidottu
जाग मछंदर गोरख आया कह कर अपने गुरु को ही जगाने वाले महाकवि गुरु गोरखनाथ ने लिखा है न मरो वै जोगी मरौ, मरण है मीठा ।मरणी मरौ जिस मरणी, गोरख मरि दीठायहां गोरख, अहंकार को मारने की बात करते हैं। तो गुरु गोरखनाथ की धरती की गमक में गमकती कथा - गोरखपुर की यह कहानियां दिल की घाटियों में संतूर की तरह बजती हैं। कथा - गोरखपुर की खास खासियत यह है कि कमोवेश सभी कहानियां गोरखपुर की माटी की खुशबू में तर-बतर हैं। इन कथाओं में गोरखपुर की माटी ऐसे बोलती है जैसे मां बोलती है। एक से एक नायाब कहानियां हैं इस कथा - गोरखपुर में । गोरखपुर की माटी की महक इन कथाओं में महकती, गमकती और इतराती हुई इठलाती मिलती है।
Katha-Gorakhpur Khand-6 (???-??????? ???-6)

Katha-Gorakhpur Khand-6 (???-??????? ???-6)

Dayanand Pandey

DIAMOND BOOKS
2023
nidottu
जाग मछंदर गोरख आया कह कर अपने गुरु को ही जगाने वाले महाकवि गुरु गोरखनाथ ने लिखा है न मरो वै जोगी मरौ, मरण है मीठा ।मरणी मरौ जिस मरणी, गोरख मरि दीठायहां गोरख, अहंकार को मारने की बात करते हैं। तो गुरु गोरखनाथ की धरती की गमक में गमकती कथा - गोरखपुर की यह कहानियां दिल की घाटियों में संतूर की तरह बजती हैं। कथा - गोरखपुर की खास खासियत यह है कि कमोवेश सभी कहानियां गोरखपुर की माटी की खुशबू में तर-बतर हैं। इन कथाओं में गोरखपुर की माटी ऐसे बोलती है जैसे मां बोलती है। एक से एक नायाब कहानियां हैं इस कथा - गोरखपुर में । गोरखपुर की माटी की महक इन कथाओं में महकती, गमकती और इतराती हुई इठलाती मिलती है।
Katha-Gorakhpur Khand-4 (???-??????? ???-4)

Katha-Gorakhpur Khand-4 (???-??????? ???-4)

Dayanand Pandey

DIAMOND BOOKS
2023
nidottu
जाग मछंदर गोरख आया कह कर अपने गुरु को ही जगाने वाले महाकवि गुरु गोरखनाथ ने लिखा है न मरो वै जोगी मरौ, मरण है मीठा ।मरणी मरौ जिस मरणी, गोरख मरि दीठायहां गोरख, अहंकार को मारने की बात करते हैं। तो गुरु गोरखनाथ की धरती की गमक में गमकती कथा - गोरखपुर की यह कहानियां दिल की घाटियों में संतूर की तरह बजती हैं। कथा - गोरखपुर की खास खासियत यह है कि कमोवेश सभी कहानियां गोरखपुर की माटी की खुशबू में तर-बतर हैं। इन कथाओं में गोरखपुर की माटी ऐसे बोलती है जैसे मां बोलती है। एक से एक नायाब कहानियां हैं इस कथा - गोरखपुर में । गोरखपुर की माटी की महक इन कथाओं में महकती, गमकती और इतराती हुई इठलाती मिलती है।
Katha-Gorakhpur Khand-1 (???-??????? ???-1)

Katha-Gorakhpur Khand-1 (???-??????? ???-1)

Dayanand Pandey

DIAMOND BOOKS
2023
nidottu
जाग मछंदर गोरख आया कह कर अपने गुरु को ही जगाने वाले महाकवि गुरु गोरखनाथ ने लिखा है न मरो वै जोगी मरौ, मरण है मीठा ।मरणी मरौ जिस मरणी, गोरख मरि दीठायहां गोरख, अहंकार को मारने की बात करते हैं। तो गुरु गोरखनाथ की धरती की गमक में गमकती कथा - गोरखपुर की यह कहानियां दिल की घाटियों में संतूर की तरह बजती हैं। कथा - गोरखपुर की खास खासियत यह है कि कमोवेश सभी कहानियां गोरखपुर की माटी की खुशबू में तर-बतर हैं। इन कथाओं में गोरखपुर की माटी ऐसे बोलती है जैसे मां बोलती है। एक से एक नायाब कहानियां हैं इस कथा - गोरखपुर में । गोरखपुर की माटी की महक इन कथाओं में महकती, गमकती और इतराती हुई इठलाती मिलती है।