Kirjojen hintavertailu. Mukana 12 595 353 kirjaa ja 12 kauppaa.

Kirjailija

Himanshu Joshi

Kirjat ja teokset yhdessä paikassa: 55 kirjaa, julkaisuja vuosilta 2010-2025, suosituimpien joukossa Análise e desenho de Fibra de Cristal Fotónica. Vertaile teosten hintoja ja tarkista saatavuus suomalaisista kirjakaupoista.

55 kirjaa

Kirjojen julkaisuhaarukka 2010-2025.

Kuchh Nikat Se : Kuchh Door Se (Edition2024)
प्रस्तुत पुस्तक में अनेक संपादकों पर भी लेख हैं जिनसे हिमांशु जोशीजी मिले। जिनमें रामानन्द 'दोषी', राजेन्द्र शर्मा, महावीर अधिकारी, भवानीप्रसाद मिश्र, रामचन्द्र तिवारी आदि भी हैं।इन दुर्लभ लेखों को संग्रहित कर एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित करना ही मात्र उद्देश्य नहीं है, बल्कि इन गुमनाम यशस्वियों के बारे में बताना जरूरी था जो समय की आंधी में कहीं खो गए हैं। आज इनमें से अधिकांश के नाम और कार्यों के विषय में लोग नहीं जानते। यह हमारे समाज का दुर्भाग्य नहीं तो क्या कहें इसे।हिमांशुजी ने सैंकड़ों लेख लिखे और साक्षात्कार भी लिए अपनी पत्रकारिता के दौरान। आज यह कुछ दुर्लभ लेख हैं पाठकों के सामने । आशा ही नहीं, विश्वास भी है कि हिमांशु जोशीजी के लोकप्रिय उपन्यासों और कहानियों की तरह लेखों का संग्रह भी पसंद आएगा पाठकों को ।
Bhule-Bisre Vyaktitwa (Edition2024)

Bhule-Bisre Vyaktitwa (Edition2024)

Himanshu Joshi

DIAMOND BOOKS
2024
sidottu
विदेशी महान व्यक्तित्वों में महामानव कागवा, पी. बी. शेली, सीमान्त गांधी, रोम्यां रोला, इलिया ऐहर्नवर्ग को भी इतिहास के कुछ पन्नों में ही समेटने का प्रयास किया। हिमांशुजी के यह सभी लेख 'दैनिक हिन्दुस्तान', 'नवभारत टाइम्स', 'साप्ताहिक हिन्दुस्तान' आदि पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। आज समय मूल्यांकन का है। आत्मचिंतन का है। इन उपेक्षित महान व्यक्तियों को हमने उचित और सम्मानजनक स्थान दिया क्या ? कितने वर्षों तक इन्हें यों ही तिरस्कृत किया जाएगा? हमें आत्ममंथन तो करना ही होगा।इन्हीं भूले-बिसरे व्यक्तित्वों को समर्पित है यह पुस्तक ।
Kuchh Nikat Se : Kuchh Door Se (Edition2024)
प्रस्तुत पुस्तक में अनेक संपादकों पर भी लेख हैं जिनसे हिमांशु जोशीजी मिले। जिनमें रामानन्द 'दोषी', राजेन्द्र शर्मा, महावीर अधिकारी, भवानीप्रसाद मिश्र, रामचन्द्र तिवारी आदि भी हैं।इन दुर्लभ लेखों को संग्रहित कर एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित करना ही मात्र उद्देश्य नहीं है, बल्कि इन गुमनाम यशस्वियों के बारे में बताना जरूरी था जो समय की आंधी में कहीं खो गए हैं। आज इनमें से अधिकांश के नाम और कार्यों के विषय में लोग नहीं जानते। यह हमारे समाज का दुर्भाग्य नहीं तो क्या कहें इसे।हिमांशुजी ने सैंकड़ों लेख लिखे और साक्षात्कार भी लिए अपनी पत्रकारिता के दौरान। आज यह कुछ दुर्लभ लेख हैं पाठकों के सामने । आशा ही नहीं, विश्वास भी है कि हिमांशु जोशीजी के लोकप्रिय उपन्यासों और कहानियों की तरह लेखों का संग्रह भी पसंद आएगा पाठकों को ।
Bhule-Bisre Vyaktitwa (Edition2024)

Bhule-Bisre Vyaktitwa (Edition2024)

Himanshu Joshi

DIAMOND BOOKS
2024
nidottu
विदेशी महान व्यक्तित्वों में महामानव कागवा, पी. बी. शेली, सीमान्त गांधी, रोम्यां रोला, इलिया ऐहर्नवर्ग को भी इतिहास के कुछ पन्नों में ही समेटने का प्रयास किया। हिमांशुजी के यह सभी लेख 'दैनिक हिन्दुस्तान', 'नवभारत टाइम्स', 'साप्ताहिक हिन्दुस्तान' आदि पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। आज समय मूल्यांकन का है। आत्मचिंतन का है। इन उपेक्षित महान व्यक्तियों को हमने उचित और सम्मानजनक स्थान दिया क्या ? कितने वर्षों तक इन्हें यों ही तिरस्कृत किया जाएगा? हमें आत्ममंथन तो करना ही होगा।इन्हीं भूले-बिसरे व्यक्तित्वों को समर्पित है यह पुस्तक ।
For You Only (Edition2024)

For You Only (Edition2024)

Himanshu Joshi

DIAMOND BOOKS
2024
nidottu
Himanshu Joshi (1935-2018) is a renowned storyteller and novelist, actively engaged in writing for nearly sixty years.His notable story collections include "Anttah Tatha Anya Kahaniyan", "Manushya Chinnah Tatha Anya Kahaniyan", "Jalte Hue Daine Tatha Anya Kahaniyan", "Teesra Kinara Tatha Anya Kahaniyan", "Antim Satya Tatha Anya Kahaniyan" and "Sagar Tat Ke Shahar".His major novels include "Mahasagar", "Aranya", "Chhaya Mat Chhuna Man", "Kagaar Ki Aag", "Samay Sakshi Hai", "Tumhare Liye" and "Su-Raj".With his intellectual memoirs, "Uttar-Parv" and "Aathva Sarg," as well as his poetry collection "Neel Nadi Ka Vriksh," he left a significant mark. His travelogues such as "Yatrayein" and "Norway: Suraj Chamke Adhi Raat" received special attention. He also wrote an untold story of the agony in the torture camp of Kala Pani called "Yatna Shivir Mein".His works have been translated and appreciated in various languages apart from all Indian languages, including English, Korean, Norwegian, Italian, Czech, Japanese, Chinese, Burmese, and Nepali. Some of his works were successfully broadcasted and performed through all india Radio and Doordarshan and have also found their place in theatre and cinema. He received numerous national and international honours and awards, adorning his literary career.
Agni-Diksh Tatha anya Kahaniya (Edition2024)
हिमांशु की कहानियों का एक संग्रह मैंने कुछ वर्ष पहले पढ़ा था। दो कहानियां उसमें अच्छी भी लगी थीं- 'मनुष्य चिह्न' और 'जलते हुए डैने।' 'जलते हुए डैने' में यह दिखाया गया है कि अंग्रेज सरकार की व्यवस्था में विद्रोह का स्वर उठाने वाले पर भी अत्याचार ही नहीं होते थे, आजादी के बाद नई व्यवस्था में भी वैसे अत्याचार किए जाते हैं। ....उपेन्द्रनाथ 'अश्क'( यशस्वी कथाकार )
Do Haath Zammen tatha anya Kahaniya (Edition2024)
सुप्रसिद्ध कथाशिल्पी हिमांशु जोशीजी द्वारा लिखित यह कहानी संग्रह अपनी विशिष्ट विविधता लिए हुए है।प्रस्तुत संग्रह की शीर्षक कहानी 'दो हाथ जमीन' 4 सितम्बर, 1960 में प्रकाशित थी 'साप्ताहिक हिन्दुस्तान' पत्रिका में। यह एक ऐसे विद्रोही की कहानी है जिसके बेटे को आग्वाद जेल में भयंकर यातनाएं दी गईं। उसकी लाश को बार-बार फांसी पर लटकाया गया । वह पुर्तगाली सरकार के अत्याचारों से भागकर भारत आना चाहता है गोआ से। ताकि मरते समय दो हाथ जमीन मिल सके अपने देश में।
Meri Awismarneey Yatrayen (???? ?????????? ????????)

Meri Awismarneey Yatrayen (???? ?????????? ????????)

Himanshu Joshi

diamond pocket books pvt ltd
2023
pokkari
सुप्रसिद्ध कथाकार हिमांशु जोशीजी के उपन्यासों, कहानियों की तरह उनके अविस्मरणीय यात्रा वृत्तातों की भी अपनी अलग विशेषता है। पढ़ते-पढ़ते पाठक को लगने लगता है कि इन यात्राओं में लेखक के साथ-साथ वह भी यात्रा कर रहा है।परिभ्रमण करने का शौक दुनिया में बहुत से लोगों को रहता है। बहुत से लोग गृह-त्याग की परम्परा का अनुगमन करते हैं तो ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं, जो परिवार-संसार के बीच रहकर जीवन भर यायावर बने रहते हैं।सैर कर दुनिया की गाफिल जिन्दगानी फिर कहाँ ? जिन्दगी गर कुछ रही, तो नौजवानी फिर कहाँ ?