Kirjojen hintavertailu. Mukana 12 390 323 kirjaa ja 12 kauppaa.

Kirjailija

Raghav Rangeya

Kirjat ja teokset yhdessä paikassa: 8 kirjaa, julkaisuja vuosilta 2012-2022, suosituimpien joukossa Bharti Ka Saput. Vertaile teosten hintoja ja tarkista saatavuus suomalaisista kirjakaupoista.

8 kirjaa

Kirjojen julkaisuhaarukka 2012-2022.

Kab Tak Pukaroon (?? ?? ???????)

Kab Tak Pukaroon (?? ?? ???????)

Raghav Rangeya

DIAMOND BOOKS
2022
pokkari
कब तक पुकारूँ रांगेय राघव द्वारा लिखा गया एक अद्भुत उपन्यास है। जिसमें राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सीमा से जुड़ा 'बैर' एक ग्रामीण क्षेत्र की कहानी कहता है। वहाँ नटों की भी बस्ती है। तत्कालीन जरायम पेशा करनटों की संस्कृति पर आधारित एक सफल आंचलिक उपन्यास है। सुखराम करनट अवैध सम्बन्ध से उत्पन नायक है। नट खेल तमाशे दिखाते हैं और नटनियाँ तमाशों के साथ-साथ दर्शकों को यौन संतुष्टि देकर आजीविका में इजाफा करती हैं। करनटों की युवा लड़कियां प्रायः ठाकरों के पास जाया करती थीं। नैतिकता क्या है, इसका ज्ञान उन्हें नहीं था। थोड़े से पैसों की खातिर वे कहीं भी चलने को तैयार हो जाती थीं।
21 Shreshtha Kahaniyan (21 ??????? ????????)
रांगेय राघव (17 जनवरी, 1923 - 12 सितंबर, 1962) हिंदी के उन विशिष्ट और बहुमुखी प्रतिभा वाले रचनाकारों में से हैं जो बहुत ही कम उम्र लेकर इस संसार में आए, लेकिन जिन्होंने अल्पायु में ही एक साथ उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार, आलोचक, नाटककार, कवि, इतिहासवेत्ता तथा रिपोर्ताज लेखक के रूप में स्वंय को प्रतिस्थापित कर दिया, साथ ही अपने रचनात्मक कौशल से हिंदी की महान सृजनशीलता के दर्शन करा दिए। आगरा में जन्मे रांगेय राघव ने हिंदीतर भाषी होते हुए भी हिंदी साहित्य के विभिन्न धरातलों पर युगीन सत्य से उपजा महत्त्वपूर्ण साहित्य उपलब्ध कराया। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर जीवनीपरक उपन्यासों का ढेर लगा दिया। कहानी के पारंपरिक ढाँचे में बदलाव लाते हुए नवीन कथा प्रयोगों द्वारा उसे मौलिक कलेवर में विस्तृत आयाम दिया। रिपोर्ताज लेखन, जीवनचरितात्मक उपन्यास और महायात्रा गाथा की परंपरा डाली। विशिष्ट कथाकार के रूप में उनकी सृजनात्मक संपन्नता प्रेमचंदोत्तर रचनाकारों के लिए बड़ी चुनौती बनी।
Bharti Ka Saput

Bharti Ka Saput

Raghav Rangeya

DIAMOND BOOKS
2022
pokkari
भारती का सपूत हिन्दी निर्माताओं में से एक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के जीवन पर आधारित अत्यन्त रोचक और मौलिक रचना है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को आधुनिक हिन्दी का पितामह माना जाता है। महाकवि जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' ने उन्हें 'भारती का सपूत' कहा था। उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में जब भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हुए, तब अवधी और ब्रजभाषा से बाहर निकलकर दैनंदिनं प्रयोग की सरल खड़ी बोली का निर्माण हो रहा था। भारतेन्दु ने विविध प्रकार की रचनाएँ देकर इसको गति प्रदान की और इसका भावी स्वरूप सुनिश्चित किया। धनी परिवार की सन्तान भारतेन्दु सामन्ती जीवन की सभी अच्छाइयों और बुराइयों का शिकार थे। वे 34 वर्ष की अल्प आयु में तपेदिक से दिवंगत हो गए, परन्तु इतने समय में ही उन्होंने इतना कुछ कर दिया जो आज तक चला आ रहा है। भारतेन्दु का व्यक्तित्व भी बड़ा रंगीला और रोचक था। लेखक रांगेय राघव इतिहास के गहरे विद्वान् और आग्रही थे, इसलिए उनका उपन्यास 'भारती का सपूत' अपना चित्रण पठनीय होने के साथ ही इतिहास सम्मत और सत्य के बहुत समीप है।
Ratna Ki Baat

Ratna Ki Baat

Raghav Rangeya

DIAMOND BOOKS
2022
pokkari
तुलसीदास की महानता का दायरा हम उनकी कालजयी रचना 'रामचरितमानस' से लगा सकते है जो आज के समकालीन विश्व में भी प्रख्यात है हमारे आस-पास हो रही रामलीला की उत्पत्ति तुलसीदास की महत्त्वता को दर्शाती है यही वजह है कि हम उन्हें भक्त कवि के रूप में जानते हैं। यह रांगेय राघव की पुस्तक आपको तुलसीदास के भक्ति जीवन को नजदीक से समझने का अवसर देगी यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी की रांगेय राघव की पुस्तक पठनीय रहती है।
Meri Bhav Baadha Haro

Meri Bhav Baadha Haro

Raghav Rangeya

DIAMOND BOOKS
2022
pokkari
संगति सुमति न पावहीं परे कुमति कै धंध।राखौ मेलि कपूर मैं, हींग न होइ सुगंध॥जैसे "रामचरितमानस" के लिए तुलसीदास प्रसिद्ध हुए ठीक उसी प्रकार 'सतसई' के लिए बिहारीलाल प्रसिद्ध हुए। उपर्युक्त पद एक असाधारण उदाहरण है उनके कलेवर का। यह पुस्तक रांगेय राघव की पठनीय ही नहीं विश्वनीय भी है, जो आपको बिहारी के जीवन को नजदीक से देखने की सामर्थ्य रखती है।
Loi Ka Taana

Loi Ka Taana

Raghav Rangeya

DIAMOND BOOKS
2022
nidottu
'लोई का ताना' उपन्यास में कबीर की झाँकी है। 'लोई का ताना' रांगेय राघव द्वारा लिया गया एक ऐसा चरित्रात्मक उपन्यास है। जिसमें हिन्दी साहित्य के महान् समाज सुधारक कवि व दार्शनिक संत कबीर की जीवन कहानी है। 'लोई कबीर की पत्नी है और कबीर ब्राह्मण विधवा से जन्मे थे तथा जुलाहा जाति दंपति से इनका पालन-पोषण हुआ था। 'लोई का ताना' एक ऐसा उपन्यास है जिसके माध्यम से कबीर के जीवन द्वारा उस युग की विद्रोहात्मक सामाजिक चेतना का चित्रण किया है। कबीर के जीवन-संबंधी तथ्य अधिक नहीं मिलते। फिर भी उनके साहित्य को पढ़कर जिन निष्कर्षों पर पहुंचे है, वह प्रशंसनीय है। उपन्यासकार ने जीवनी, इतिहास और आलोचना के त्रिभुज द्वारा कबीर के जीवन का चित्रण किया है।
Lakhima Ki Aankhen

Lakhima Ki Aankhen

Raghav Rangeya

DIAMOND BOOKS
2022
pokkari
इस उपन्यास में रानी लखिमा और विद्यापति की प्रेम कथा है। राजा शिवप्रसाद सिंह विद्यापति के आयदाता होने के साथ-साथ उनके मित्र भी थे। रांगेय राघव ने विद्यापति के दोनों भक्त व श्रृंगारी कवि रूपों का संघर्ष किया है। विद्यापति के जीवन गाथा के साथ ही तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों का वर्णन भी उपन्यास में सशक्त ढंग से आया है। 'लखिमा की आंखें' में रांगेय राघव ने राजा शिवसिंह और विद्यापति की मित्रता के साथ रानी लखिमा और विद्यापति के प्रति आकर्षण भी वर्णित किया है। इसी उपन्यास में विद्यापति के संघर्षमय जीवन का भी वर्णन किया गया है।
Yashodhara Jeet Gai

Yashodhara Jeet Gai

Raghav Rangeya

DIAMOND BOOKS
2012
pokkari
रांगेय राघव जी इस उपन्यास की भूमिका में स्वयं बताते हैं कि इस उपन्यास की रचना का मूलस्रोत त्रिपिटक ग्रंथ रहे हैं उन्होंने त्रिपिटक ग्रंथों में महात्मा बुद्ध के जीवन से संबंधित जिन कथाओं को पढ़ा, उनके आधार पर ही उन्होंने इस उपन्यास के कथानक को गढ़ा किंतु एक बात वह स्पष्ट कहते हैं कि मैंने अपनी कथा का दृष्टिकोण ऐतिहासिक रखा है धार्मिक या राजनीतिक नहीं वास्तव में इस उपन्यास में यह बताया गया है कि जिस समय बुद्ध का उत्कर्ष काल था उस समय भारतीय इतिहास में धार्मिक और राजनीतिक असंतुलन भी अपने उत्कर्ष पर हो गया था।